दरवाजे के पास छोटी कटोरी: कुणाल की सुबह का एक सरल आधार
सुबह बाहर निकलते समय कुणाल की चाबी फिर नहीं मिल रही थी। उसने मेज देखी, कुर्सी के नीचे देखा और पिछले दिन का बैग उलट दिया। दस मिनट बाद चाबी रसोई की खिड़…
पूरा लेख पढ़ें →स्वाध्याय के लिए प्रेरक विचार, संस्कृत और वैदिक ज्ञान।
सुबह बाहर निकलते समय कुणाल की चाबी फिर नहीं मिल रही थी। उसने मेज देखी, कुर्सी के नीचे देखा और पिछले दिन का बैग उलट दिया। दस मिनट बाद चाबी रसोई की खिड़…
पूरा लेख पढ़ें →मिट्टी के काम की खुली प्रदर्शनी के लिए ऐश्वर्या ने पूरा आँगन नापकर मेजों की जगह तय की थी। लोग भीतर आएँगे, एक ओर तैयार बर्तन देखेंगे और दूसरी ओर कलाकार…
पूरा लेख पढ़ें →रंगमंच समूह की बैठक में आरुष ने फिर एक अतिरिक्त काम के लिए हाथ उठा दिया। इस सप्ताह उसे कार्यालय का जरूरी काम पूरा करना था और शनिवार को घर में पहले से …
पूरा लेख पढ़ें →कढ़ाई की कक्षा में पहले दिन मिली छोटी कपड़े की पट्टी पर प्रज्ञा ने अपना नाम लिख लिया। उसे लगा था कि कुछ सप्ताह में वह सुंदर फूलों वाला रुमाल बना लेगी।…
पूरा लेख पढ़ें →ग्राहक के लिए तैयार की जाने वाली सूची बनाते समय रोहित के सामने पाँच खिड़कियाँ खुली थीं। एक में वस्तुओं के नाम, दूसरी में पुराने दाम, तीसरी में ईमेल और…
पूरा लेख पढ़ें →सुबह आँख खुलते ही समीक्षा फोन उठाती और रात भर आए संदेश देखने लगती। किसी मित्र की तस्वीर, कार्यालय की चर्चा, खरीद का विज्ञापन और परिवार की सूचना एक साथ…
पूरा लेख पढ़ें →दिन समाप्त होने पर तुषार अपनी सूची खोलता और सबसे पहले अधूरे काम गिनता। सुबह दस बातें लिखी थीं, रात को चार पर निशान था। उसे लगता कि पूरा दिन निकल गया औ…
पूरा लेख पढ़ें →रविवार की सुबह लावण्या ने कोई काम नहीं रखा था। पिछले सप्ताह लगातार बाहर रहना पड़ा था और घर लौटते ही छोटे काम जमा मिलते थे। उसने सोचा कि आज कुछ देर शां…
पूरा लेख पढ़ें →प्रतियोगिता के लिए आवेदन भेजने की अंतिम तारीख पास थी। मयंक ने सोचा कि जितनी जल्दी फॉर्म भर देगा, उतनी जल्दी बाकी काम शुरू कर सकेगा। उसने निर्देश का पन…
पूरा लेख पढ़ें →कार्यालय से लौटते समय हर्षिता के फोन पर तीन संदेश आए। एक मित्र ने कार्यक्रम का पोस्टर देख लेने को कहा था, दूसरे ने सप्ताहांत की बैठक पूछी और घर से कुछ…
पूरा लेख पढ़ें →नई डायरी का पहला पन्ना खोलते ही अदिति को लगता था कि यहाँ कुछ खास लिखा जाना चाहिए। सुंदर कवर, साफ कागज और अच्छी कलम के सामने साधारण वाक्य छोटा पड़ जाता…
पूरा लेख पढ़ें →कहानी का अंतिम पन्ना लिखते समय कबीर हमेशा जल्दी करता था। शुरुआत में पात्र, जगह और छोटे संबंध बहुत ध्यान से बनाता, लेकिन अंत आते ही उसे लगता कि अब पाठक…
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