माफी के बाद का व्यवहार: फूलों से आगे का साथ

रिया दरवाजे के पास तैयार बैठी थी। उसे अपनी पहली कहानी पाठ में पहुँचना था और विवान ने साथ चलने का वादा किया था। समय निकला, फिर उसका संदेश आया कि बैठक थोड़ी लंबी हो गई है। रिया अकेली चली गई। कार्यक्रम के बीच विवान पहुँचा और बार बार माफी माँगने लगा। रिया ने धीरे से कहा कि अभी वह अपनी कहानी पर ध्यान देना चाहती है।
यह पहली बार नहीं था। कभी सामान लेने का वादा छूटता, कभी किसी तय समय पर फोन नहीं आता और कभी साथ का कार्यक्रम अंतिम समय पर बदल जाता। विवान बुरा इरादा नहीं रखता था। वह अक्सर एक ही समय में बहुत से वादे कर देता और हर व्यक्ति को खुश रखना चाहता। लेकिन उसका अच्छा इरादा रिया के इंतजार की व्यवस्था नहीं कर पाता था।
घर लौटकर उसने फूल दिए। रिया ने फूल मेज पर रखे और कहा कि वे सुंदर हैं, पर उसे कुछ और चाहिए। विवान को लगा कि उसकी माफी स्वीकार नहीं की जा रही। उसने कहा कि गलती तो सबसे होती है। रिया ने सहमति दी। फिर पूछा कि एक जैसी गलती बार बार हो तो हर बार उसे केवल सामान्य भूल कह देने से सामने वाले को क्या भरोसा मिलेगा।
बात सुनकर विवान ने पहले अपना बचाव किया। काम बहुत है, लोग समझते नहीं, समय हाथ से निकल जाता है। रिया चुपचाप सुनती रही। फिर उसने कहा कि उसे यह जानना है कि वह किन बातों पर भरोसा करके अपनी तैयारी करे। यदि साथ चलना संभव नहीं है तो पहले बताना बेहतर है। किसी का इंतजार करने से उसका अपना काम, रास्ता और मन तीनों बदलते हैं।
विवान ने उस रात तुरंत नया बड़ा वादा नहीं किया। उसने अगले सप्ताह की अपनी सूची देखी। उसमें कुछ काम तय थे और कुछ उसने केवल उत्साह में स्वीकार किए थे। हर जगह हाँ कहने के कारण वह हर जगह अधूरा पड़ रहा था। उसने दो लोगों को पहले से अपनी अनुपलब्धता बताई। यह उसे असहज लगा, लेकिन आखिरी समय गायब होने से अधिक ईमानदार था।
रिया के अगले कार्यक्रम के लिए उसने पूछा कि उसे किस प्रकार का साथ चाहिए। इस बार केवल मंच पर बैठना नहीं था। कुछ प्रतियाँ पहुँचानी थीं और कार्यक्रम से पहले एक शांत अभ्यास सुनना था। दोनों ने समय तय किया। विवान ने अपने काम के बीच आने जाने का अंतर भी रखा। वह केवल गंतव्य पर पहुँचने का समय लिखता था, वहाँ तक जाने का नहीं।
कार्यक्रम वाले दिन एक काम फिर अटक गया। उसने देखा कि देर हो सकती है। पुराने ढंग से चलता तो सोचता कि अभी पूरा कर लूँगा और बाद में समझा दूँगा। इस बार उसने तुरंत सूचना दी। प्रतियाँ पहुँचाने की दूसरी व्यवस्था समय रहते बन गई। वह तय समय पर पहुँचा भी, लेकिन रिया के लिए उससे अधिक उपयोगी यह था कि उसके पास अनुमान के बजाय स्पष्ट जानकारी थी।
एक अच्छे दिन से पिछली नाराजगी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। रिया अभी भी कुछ बातों में संकोच करती थी। विवान चाहता था कि वह उसकी बदलती कोशिश तुरंत पहचान ले। फिर उसे लगा कि भरोसा किसी परीक्षा का परिणाम नहीं है जो एक सफलता पर पूरा मिल जाए। दूसरे व्यक्ति को अपने अनुभव बदलते देखने का समय भी देना पड़ता है।
धीरे धीरे उसने छोटे वादे सावधानी से करने शुरू किए। जिस काम का समय नहीं था, उसके लिए साफ मना करता। कोई भूल हो जाए तो पहले उसका प्रभाव सुनता, फिर सुधार की व्यवस्था करता। माफी के साथ इतना कहना कि अब नहीं होगा आसान था। अगली बार अलग ढंग से तैयारी करना अधिक कठिन, पर अधिक उपयोगी काम निकला।
रिया ने भी अपनी जरूरत अस्पष्ट संकेतों में रखने के बजाय स्पष्ट कहना शुरू किया। उसे हर बात में साथ नहीं चाहिए था और हर अवसर पर एक ही प्रकार की मदद भी नहीं। दोनों के बीच बातचीत किसी एक को दोषी सिद्ध करने से निकलकर वास्तविक काम पर लौटने लगी। फिर भी रिया की सीमा का सम्मान रहा। किसी दिन वह अकेले जाना चाहे तो उसे पुराने विवाद का दंड नहीं कहा गया।
कहानी पाठ के कुछ महीने बाद विवान ने पूछा कि क्या उसकी माफी तब अधूरी थी। रिया ने कहा कि शब्द आवश्यक थे, क्योंकि उनसे उसने गलती स्वीकार की थी। लेकिन बाद का व्यवहार बताता है कि उस स्वीकार को कितनी जगह मिली। मेज पर पुराने फूल अब नहीं थे। उनकी जगह एक छोटी पुस्तक रखी थी, जिसे कार्यक्रम से लौटते समय दोनों ने साथ चुना था। इस बार स्मृति में देर का इंतजार नहीं, समय पर पहुँचा हुआ साथ था।