वैदिक प्रेरणा

दीवार की खाली जगह: रिद्धि ने नमन को फोन किया

वैदिक प्रेरणा2026-10-22समाज और संवेदना • कथा
दीवार की खाली जगह: रिद्धि ने नमन को फोन किया
साझा प्रदर्शनी की तैयारी में रिद्धि पिछले तीन सप्ताह से सभी कलाकारों को समय पर चित्र भेजने की याद दिला रही थी। उसने कक्ष की दीवारों का नक्शा बनाया, नामपट्टियाँ तैयार कराईं और उद्घाटन की तारीख तय की। केवल एक कलाकार, नमन, लगातार देर से उत्तर दे रहा था। एक दिन उसका संदेश आया कि वह बैठक में नहीं पहुँच पाएगा। रिद्धि ने फोन मेज पर रखा और कहा कि कुछ लोग समूह में नाम तो लिखवा लेते हैं, जिम्मेदारी आने पर गायब हो जाते हैं। पास बैठे दो लोगों ने भी सहमति जताई। अगली सुबह किसी ने सुझाव दिया कि नमन का स्थान दूसरे कलाकार को दे दिया जाए। रिद्धि इसके लिए तैयार थी। उसने मन ही मन तय कर लिया था कि नमन काम के प्रति गंभीर नहीं है। तभी चित्रों की सूची बनाते हुए उसे पिछले वर्ष की एक फाइल मिली। उसमें नमन ने समय से काम भेजा था और अंतिम दिन दूसरों की व्यवस्था में भी सहयोग किया था। यह पुरानी बात उसकी वर्तमान नाराजगी को गलत सिद्ध नहीं करती थी, लेकिन उसके बनाए पूरे व्यक्तित्व के निर्णय को कुछ अस्थिर जरूर करती थी। रिद्धि ने उसे फोन किया। नमन ने कहा कि अभी लंबी बातचीत संभव नहीं है, वह शाम को स्थिति बता देगा। रिद्धि को फिर लगा कि बात टाली जा रही है। लेकिन इस बार उसने आरोप लिखने के बजाय एक स्पष्ट प्रश्न भेजा कि चित्र किस तारीख तक मिल सकते हैं और यदि संभव न हों तो आयोजन की सूची कैसे बदली जाए। उसने यह भी लिखा कि निजी कारण विस्तार से बताना जरूरी नहीं है। उसे आयोजन की योजना के लिए समय और उपलब्धता का उत्तर चाहिए था। शाम को नमन ने बताया कि उसके घर में देखभाल की एक अचानक जिम्मेदारी आ गई है। वह अपना मूल प्रस्ताव पूरा नहीं कर पाएगा। दो तैयार छोटे चित्र उपलब्ध थे, जिन्हें वह अगले दिन भेज सकता था। रिद्धि ने निजी परिस्थिति की पुष्टि के लिए विवरण या प्रमाण नहीं माँगे। उसने उपलब्ध चित्रों का आकार पूछा और दीवार के नक्शे में जगह देखी। प्रदर्शनी की जरूरतें अभी भी वास्तविक थीं। उन्हें केवल सहानुभूति जताकर छोड़ना नहीं था। दोनों ने काम का छोटा, संभव हिस्सा तय किया और बाकी स्थान दूसरे कलाकार को देने पर सहमति बनाई। इस बातचीत के बाद रिद्धि ने समूह में लिखा कि सूची में बदलाव हुआ है और नई व्यवस्था यह रहेगी। उसने नमन के घर की बात साझा नहीं की। जिन दो लोगों के सामने उसने उसे गैरजिम्मेदार कहा था, उनसे अलग से कहा कि उसका निष्कर्ष जल्दबाजी का था। नमन की देर से सूचना के कारण परेशानी हुई थी, लेकिन उस एक व्यवहार से उसने उसके पूरे स्वभाव पर फैसला लगा दिया था। उसे अपनी नाराजगी वापस लेने की जरूरत नहीं लगी; उसे उसका सही विषय पहचानना था। उद्घाटन के दिन नमन थोड़ी देर के लिए आया। वह सामान्य बातचीत करता रहा और अपने दोनों चित्र देखकर मुसकराया। रिद्धि ने उसे सबके सामने संघर्ष की कहानी सुनाने को नहीं कहा। बाद में दोनों ने आयोजन की अगली योजना पर बात की। रिद्धि ने बताया कि समय से सूचना मिलना जरूरी है और नमन ने माना कि वह एक छोटा संदेश पहले भेज सकता था। परिस्थिति समझ लेने का अर्थ अपेक्षाएँ समाप्त कर देना नहीं था। इससे अपेक्षाओं को ऐसे शब्द मिले, जिनमें अपमान नहीं जुड़ा था। रात को कक्ष बंद करते समय रिद्धि ने दीवारों की तस्वीरें लीं। एक खाली जगह सुबह तक उसे बड़ी कमी लग रही थी, अब वहाँ दूसरे कलाकार का छोटा चित्र था। उसने सोचा कि योजना में बदलाव करना कई बार व्यक्ति पर फैसला सुनाने से अधिक उपयोगी होता है। हर देरी का कारण अच्छा हो, यह मानना भी ठीक नहीं; हर देरी को चरित्र की कमी कहना भी आसान रास्ता है। अगली बार वह पहले तथ्य, उपलब्धता और अपनी जरूरत पूछेगी। निर्णय लेने से पहले थोड़ी बातचीत के लिए जगह रखना उसने इसी प्रदर्शनी में सीखा था।

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