आखिरी ताली के बाद का मैदान: आकृति ने सूची पूरी की

रात के कार्यक्रम की आखिरी तस्वीर में सब मुस्करा रहे थे। मंच पर फूल थे, पीछे कपड़े की सजावट और सामने पुरस्कार लिए लोग। आकृति ने समूह में धन्यवाद भेजा और लिखा कि उत्सव बहुत अच्छा रहा। अगले दिन वह अपना छूटा सामान लेने लौटी तो मैदान का दूसरा रूप देखा। कुर्सियाँ हट रही थीं, कुछ सजावट गीली घास पर पड़ी थी और सफाई के लिए आए लोग रास्ता खोलने में लगे थे। बत्तीस वर्ष की आकृति आयोजन में पूरे समय व्यस्त रही थी, मगर उसके दिमाग में कार्यक्रम समाप्त होने का क्षण अंतिम ताली पर रुक गया था।
उसने एक कर्मचारी से पूछा कि इतना सामान अभी क्यों पड़ा है। उन्होंने बताया कि कुछ चीजें किराए की हैं, कुछ आयोजकों की और कुछ हटाने का निर्णय किसी ने स्पष्ट नहीं किया। सबको जल्दी अपने घर जाना था। सफाई का काम तय था, मगर किस चीज को फेंकना नहीं है, यह जानकारी अलग थी। आकृति को अपनी शिकायत का स्वर बदलना पड़ा। वह जिस अधूरेपन का कारण सामने खड़े लोगों को मान रही थी, उसका हिस्सा उसकी आयोजन सूची में ही था। सूची में मंच सजाने की कई पंक्तियाँ थीं; समेटने की केवल एक पंक्ति थी कि बाद में सफाई हो जाएगी।
आकृति ने आयोजन दल को बात बताई। कुछ लोग काम पर जा चुके थे, इसलिए सब तुरंत नहीं आ सके। उपलब्ध लोगों ने सही व्यक्ति से समन्वय करके अपनी जिम्मेदारी ली। पुनः इस्तेमाल योग्य कपड़ा अलग रखा गया, किराए का सामान पहचान के साथ लौटाने की तैयारी हुई और कचरे का संग्रह स्थानीय व्यवस्था के अनुसार तय हुआ। किसी अपरिचित या जोखिम वाली चीज को स्वयं खोलने और छाँटने का प्रयोग नहीं किया गया। जहाँ पेशेवर काम चाहिए था, उन्हीं लोगों को करने दिया गया। मदद का अर्थ उनके काम के बीच खड़े होकर आदेश देना नहीं था, जरूरी जानकारी और रास्ता उपलब्ध कराना था।
दोपहर तक मैदान कुछ साफ दिखने लगा। आकृति ने एक तस्वीर लेने का मन किया, फिर पहले पूछा कि काम पूरा हुआ है या केवल उसका दिखने वाला हिस्सा। सफाई कर्मी ने मैदान के दूसरे कोने का ध्यान दिलाया। वहाँ अभी सामान बाकी था। उसे लगा कि रात की सुंदर तस्वीर की तरह दिन की साफ तस्वीर भी कुछ हिस्से छोड़ सकती है। उसने इस बार पूरा काम सही जिम्मेदार लोगों से देखकर ही धन्यवाद भेजा। संदेश में आयोजन के बाद काम करने वाले लोग भी शामिल थे, केवल मंच पर रहे नाम नहीं।
अगली बैठक में किसी ने कहा कि अब हर कार्यक्रम के बाद स्वयंसेवक सफाई करेंगे। आकृति ने प्रस्ताव को थोड़ा साफ किया। स्वयंसेवा के साथ नियमित व्यवस्था, सही उपकरण, काम की सुरक्षा और जिम्मेदार सेवा का समन्वय जरूरी था। उत्साह से काम शुरू कर देना हर काम का उचित तरीका नहीं होता। उन्हें अगले आयोजन में पहले से समेटने का क्रम बनाना था। किस चीज का उपयोग दोबारा होगा, कौन सामान वापस ले जाएगा और किस समय जगह पूरी तरह उपलब्ध होगी, यह तय हुआ। सफाई करने वाले लोगों की बात भी तैयारी में शामिल की गई, बाद की शिकायत में ही नहीं।
कई महीनों बाद नया उत्सव आया। इस बार सजावट थोड़ी कम थी और सामान का हिसाब अधिक स्पष्ट। कुछ लोगों को मंच पहले जितना भरा हुआ नहीं लगा, मगर काम के बाद लौटने वाला क्रम आसान हुआ। आखिरी गीत समाप्त हुआ तो कार्यक्रम की खुशी बनी रही, साथ ही कुछ लोगों ने अपने तय काम शुरू किए। अगले दिन आकृति मैदान आई तो एक सूची पर अंतिम पुष्टि बाकी थी। उसने उसे पूरा कराया। इस छोटे कागज की कोई आकर्षक तस्वीर नहीं थी, फिर भी उसे लगा कि आयोजन की गुणवत्ता का जरूरी हिस्सा यहीं दिखाई दे रहा है।
समूह में धन्यवाद का संदेश भेजते समय आकृति ने रात और अगली सुबह दोनों को याद किया। उसे उत्सव की चमक कम नहीं करनी थी। वह चाहती थी कि उसकी खुशी के बाद बची जगह किसी और की अनदेखी परेशानी न बने। मैदान फिर रोज की गतिविधियों के लिए खुल गया। लोग घूमने आए, बेंच पर बैठे और सामान्य दिन शुरू हुआ। आकृति के लिए वही वापसी कार्यक्रम का आखिरी दृश्य बनी। तालियों के बाद का काम जोड़ने से उत्सव छोटा नहीं हुआ था; उसकी जिम्मेदारी बस पूरे समय तक दिखाई देने लगी थी।