प्रीतिलता वाड्देदार: पढ़ने वाली युवती अपने समय का प्रश्न भी पूछ सकती है

ऐतिहासिक प्रसंग पर आधारित विचार
किसी छात्रा की उपलब्धि सुनते समय हम प्रायः उसके अंकों, पुरस्कारों और आगे की पढ़ाई के विषय में पूछते हैं। यह स्वाभाविक है, लेकिन शिक्षा का संसार इतना ही नहीं। पढ़ने वाला मन अपने आसपास के अन्याय को भी देख सकता है। वह पूछ सकता है कि सम्मान का अधिकार किसके पास है, अवसर किन लोगों को मिलते हैं और किन लोगों की आवाज को आसानी से अनसुना कर दिया जाता है। प्रीतिलता वाड्देदार का जीवन इस प्रश्न को इतिहास की गंभीर जमीन पर रखता है।
प्रीतिलता का संबंध चटगाँव से था। संस्कृति मंत्रालय के जीवन-विवरण में उनकी शैक्षिक प्रतिभा, पुरस्कारों और उच्च अध्ययन से जुड़ाव का उल्लेख है। वे सूर्य सेन के नेतृत्व वाले क्रांतिकारी समूह से जुड़ीं और पहाड़तली यूरोपियन क्लब पर कार्रवाई में नेतृत्व किया। उस संघर्ष के दौरान केवल इक्कीस वर्ष की आयु में उनका जीवन समाप्त हुआ। उनकी कहानी में एक युवा स्त्री को केवल प्रेरित अनुयायी मान लेना पर्याप्त नहीं; उसमें निर्णय लेने और नेतृत्व करने की भूमिका भी देखनी चाहिए।
प्रतिभा को किस सीमा में देखते हैं?
जब कोई लड़की पढ़ाई में अच्छी होती है, तो हम उसकी प्रशंसा करते हैं। लेकिन वही लड़की किसी व्यवस्था पर कठिन प्रश्न उठाए, तो उसे चुप रहने की सलाह भी दी जा सकती है। तब उसे बताया जाता है कि उसे केवल अपने काम से मतलब रखना चाहिए। यह विरोधाभास सोचने योग्य है। क्या हम शिक्षा इसलिए चाहते हैं कि व्यक्ति केवल दिए हुए उत्तर अच्छी तरह दोहराए, या इसलिए भी कि वह अपने समय को अधिक स्पष्टता से समझ सके?
प्रीतिलता के ऐतिहासिक संघर्ष की परिस्थितियाँ आज से भिन्न थीं। औपनिवेशिक दमन और सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ को मिटाकर उनके जीवन को सामान्य प्रेरक सूत्र में बदल देना उचित नहीं। फिर भी उनकी स्मृति हमें स्त्री की स्वतंत्र बौद्धिक और नैतिक क्षमता पर विचार करने का अवसर देती है। किसी युवती के साहस को केवल असाधारण अपवाद कहकर छोड़ देना सामान्य जीवन में मौजूद सीमाओं को छिपा सकता है।
शिक्षा का एक उपयोग प्रश्न पूछने की भाषा देना है। व्यक्ति अपने असंतोष को केवल क्रोध के रूप में व्यक्त करने के बजाय उसके कारण पहचानना सीख सकता है। उसे यह समझने की क्षमता मिल सकती है कि व्यक्तिगत असुविधा और व्यापक अन्याय में क्या अंतर है। शिक्षा तभी अधिक सार्थक होती है जब जानकारी के साथ जिम्मेदार विचार भी विकसित हो।
प्रशंसा के पीछे छिपी सीमा
हम कभी कहते हैं कि किसी लड़की ने लड़कों जैसा साहस दिखाया। इस वाक्य में प्रशंसा का इरादा हो सकता है, लेकिन अनजाने में साहस को किसी एक लिंग की संपत्ति मान लिया जाता है। किसी स्त्री की प्रतिभा, निर्णय और नेतृत्व को उनकी अपनी पूर्णता में देखने की जरूरत है। उसे महत्वपूर्ण मानने के लिए किसी दूसरे की समानता का प्रमाणपत्र आवश्यक नहीं होना चाहिए।
विद्यालय और परिवार में यह बदलाव बहुत छोटे व्यवहार से शुरू हो सकता है। चर्चा का नेतृत्व कौन करेगा? कठिन प्रश्न किसे पूछने दिया जाएगा? समूह के निर्णय में किसकी बात सुनी जाएगी? यदि जिम्मेदारी की भूमिका पहले से एक ही प्रकार के बच्चों को दी जाती रहे, तो दूसरों की क्षमता दिखाई देने का अवसर कम हो जाता है। बराबरी केवल प्रवेश की अनुमति नहीं, योगदान के वास्तविक अवसर से भी बनती है।
इतिहास पढ़ते समय भी हमारी भाषा पर ध्यान जरूरी है। किसी महिला क्रांतिकारी का परिचय केवल किसी पुरुष के सहयोगी के रूप में देना उसके काम का पूरा वर्णन नहीं करता। साथियों और संगठन का संदर्भ आवश्यक है, लेकिन उसके अपने निर्णय को अदृश्य नहीं करना चाहिए। प्रीतिलता की कहानी में शिक्षा, नेतृत्व और संघर्ष को साथ देखना इसी दृष्टि का अभ्यास है।
वर्तमान के लिए जीवनदायी प्रेरणा
इतनी कम आयु में समाप्त हुए जीवन को याद करना हमें केवल उत्साह से नहीं भरना चाहिए। उसमें खोई हुई संभावनाओं की गंभीरता भी है। आज किसी छात्रा के लिए उनकी स्मृति से प्रेरणा लेने का अर्थ जोखिमपूर्ण कार्य का अनुकरण करना नहीं। वह अध्ययन में गंभीरता, अन्याय के प्रति सजगता, अपने अधिकार की समझ और समाज में जिम्मेदार भागीदारी के रूप में भी प्रकट हो सकती है।
प्रीतिलता वाड्देदार को याद रखने का एक सुंदर तरीका यह होगा कि हम अपने आसपास की लड़कियों को केवल आज्ञाकारी और सफल बनने का ही नहीं, विचारशील और जिम्मेदार बनने का अवसर दें। उनकी बात को सुनें, प्रश्न को महत्व दें और नेतृत्व के लिए स्थान खोलें। इतिहास की एक युवा स्त्री की स्मृति तब वर्तमान की अनेक छात्राओं के लिए संभावना का दरवाजा बन सकती है।
संदर्भ और आगे पढ़ें
1. संस्कृति मंत्रालय: प्रीतिलता वाड्देदार का जीवन-परिचय
https://amritmahotsav.nic.in/unsung-heroes-detail.htm?137=
2. पत्र सूचना कार्यालय: स्वतंत्रता आंदोलन के अल्पज्ञात नायक, पृष्ठ 16
https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/Unsung%20Heroes%20of%20Freedom%20Movement_p1.pdf#page=16
चित्र संबंधी सूचना: थंबनेल इस लेख के लिए बनाया गया कल्पनात्मक चित्रांकन है; इसे वास्तविक घटना का फोटोग्राफ या ऐतिहासिक व्यक्ति का प्रमाणित चित्र न मानें।