अलग रंग की नई पकड़: जूही का पुराना थैला फिर लौटा

कपड़े के पुराने थैले की पकड़ टूट गई तो जूही ने उसे दरवाजे के पास रख दिया। नए थैले की तस्वीर भी फोन में देख ली। अगले दिन कॉलोनी के सूचना पट्ट पर छोटी बैठक का संदेश मिला। लोग अपनी सामान्य सिलाई या मरम्मत योग्य वस्तुएँ लेकर आएँगे और अनुभवी कारीगर देखकर बताएँगे कि क्या ठीक हो सकता है। जूही को लगा कि उसका थैला बहुत साधारण है। फिर उसने सोचा कि नया मँगाने से पहले एक बार दिखा देने में क्या हर्ज है। वह रविवार को वही थैला लेकर नीचे चली गई।
बैठक में कोई बड़ा मंच नहीं था। दो मेजों पर धागे, कुछ कपड़े और लोगों के लाए छोटे सामान रखे थे। पास की दुकान से आए दर्जी इकबाल ने थैला देखा और कहा कि पहले उसकी हालत पूरी देखनी होगी। केवल टूटी पकड़ जोड़ देने से काम नहीं चलेगा यदि बाकी कपड़ा कमजोर हो। जूही को अच्छा लगा कि तुरंत चमत्कारी समाधान नहीं बताया गया। कुछ वस्तुओं को उन्होंने अलग सेवा वाले व्यक्ति को दिखाने को कहा। हर चीज वहीं बिना जानकारी के खोलकर ठीक करने का उत्साह नहीं था। बैठक की उपयोगिता अपनी सीमा पहचानने में भी थी।
जूही का थैला इस्तेमाल लायक था। इकबाल ने उसकी पकड़ ठीक करने का काम लिया और बताया कि कितना समय लगेगा। जूही ने पूछा कि क्या वह थोड़ी सामान्य सिलाई देख सकती है। उन्होंने उसे पास बैठने दिया। वह पूरा कौशल एक बैठक में सीख नहीं गई, पर उसे काम की सावधानी और क्रम दिखाई दिया। पहले वह मरम्मत को किसी खराब चीज पर लगाया अस्थायी जोड़ मानती थी। अब उसे लगा कि ठीक से की गई मरम्मत भी अपने आप में हुनर है। उसे बनाने और सिखाने वाले व्यक्ति के समय का सम्मान होना चाहिए।
एक पड़ोसी ने कहा कि नया थैला तो कम दाम में मिल जाता। जूही ने माना कि हर वस्तु और हर परिस्थिति में मरम्मत ही सही फैसला नहीं होगी। कभी वस्तु सुरक्षित उपयोग लायक नहीं रहती, कभी आवश्यक हिस्सा नहीं मिलता और कभी समय की अलग सीमा होती है। उस दिन उसका थैला ठीक हो सकता था और उसे इस्तेमाल करना पसंद था। इसलिए केवल नया सामान जल्दी मिल जाने से पुराने को तुरंत छोड़ देना जरूरी नहीं लगा। वह अपने छोटे निर्णय को सबके लिए एक कठोर नियम नहीं बना रही थी।
बैठक के अंत में आयोजकों ने फिर समूह की तस्वीर लेने को कहा। इकबाल ने कहा कि पहले लोगों का बाकी सामान सही नाम से लौटा दें। थोड़ी देर में पता चला कि दो एक जैसी थैलियाँ बदल गई थीं। सबने हँसकर उन्हें ठीक किया। जूही को यह छोटी घटना आयोजन की याद में सबसे साफ रही। सुंदर विचार का रोज का रूप नाम लिखने, काम की सीमा बताने, समय तय करने और सामान सुरक्षित लौटाने में आता था। केवल मंच पर मरम्मत की तारीफ कर देना उसे उपयोगी सेवा नहीं बनाता।
अगले सप्ताह जूही वही थैला लेकर बाजार गई। पकड़ अलग रंग के कपड़े से मजबूत की गई थी और जोड़ साफ दिखाई देता था। उसे उसे छिपाने की जरूरत नहीं लगी। घर लौटकर उसने अलमारी में कुछ और चीजें देखीं, लेकिन सबको एक साथ मरम्मत की सूची में नहीं भर दिया। पहले उपयोग और हालत देखी। कुछ चीजें किसी और को काम आ सकती थीं, कुछ के बारे में सही सलाह लेनी थी और कुछ छोड़नी थीं। ठहरकर देखने की आदत ने विकल्प बढ़ाए थे, हर चीज सदा रखने की मजबूरी नहीं बनाई थी।
कॉलोनी की अगली बैठक छोटी रही। इस बार भीड़ और तस्वीरें कम थीं, मगर पहले वाली असुविधाओं से कुछ सीखा गया था। कारीगरों के काम का समय स्पष्ट था और लोगों ने सामान पहले दर्ज कराया। जूही अपने अनुभव में सबसे बड़ा परिवर्तन यही मानती थी कि टूटे हुए हिस्से को देखकर उसकी पहली प्रतिक्रिया अब तुरंत खरीद का पन्ना खोलना नहीं रही। वह पूछ सकती थी कि क्या ठीक हो सकता है और किससे सही मदद मिलेगी। पुराने थैले की बदली हुई पकड़ उसकी नजर में कमी का निशान नहीं थी। वह उस छोटे उत्सव की याद थी जिसमें नई वस्तु आने के बजाय एक परिचित चीज फिर रोज के काम में लौट आई थी।