पोस्टर के नीचे बंद जाली: नीलिमा ने बरसात से पहले देखा

दुकान का नया पोस्टर लगाते समय नीलिमा की नजर नीचे गई। फुटपाथ के किनारे पानी निकलने की जाली पर सूखे पत्ते, पैकिंग की पन्नियाँ और छोटे कागज जमा थे। बारिश अभी शुरू नहीं हुई थी। पिछले साल इसी मोड़ पर पानी रुकने के बाद कई दिन सबने तस्वीरें भेजी थीं। उस समय दुकान तक आना कठिन हुआ था। नीलिमा ने सोचा कि इस बार पहले बात कर लेनी चाहिए। फिर ग्राहक आ गया और उसका ध्यान बदल गया। शाम को शटर बंद करते समय जाली वहीं थी और उसका सोचा हुआ काम अब भी केवल मन में था।
अगली सुबह उसने पड़ोसी दुकानदार से कहा कि संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वे पिछले सप्ताह संदेश भेज चुके हैं। नीलिमा ने पूछा कि स्थान और समस्या का स्पष्ट विवरण गया था या केवल पुरानी बरसात की तस्वीर। दोनों ने संदेश देखा। उसमें सड़क का नाम था, सही मोड़ नहीं। नई तस्वीर लेकर उन्होंने स्थान साफ किया और उपलब्ध शिकायत व्यवस्था से सूचना दर्ज कराई। उन्हें यह नहीं पता था कि काम कब होगा। फिर भी शिकायत किसी अनिश्चित नाराजगी की जगह एक पहचान योग्य समस्या तक पहुँची थी।
दोपहर को बाजार की बातचीत में कई लोगों ने कहा कि बरसात आते ही सब फिर वैसा होगा। नीलिमा ने भविष्य की पूरी तस्वीर से बहस नहीं की। उसने पूछा कि दुकान से निकलने वाली पैकिंग का कचरा अभी कहाँ रखा जाता है। कुछ हल्के थैले बाहर पड़े रहते और हवा से उसी कोने में पहुँच जाते थे। किसी ने जानकर जाली भरने का इरादा नहीं किया था, लेकिन परिणाम का एक हिस्सा उनके अपने काम से जुड़ा दिख रहा था। उन्होंने अपनी दुकानों का कचरा सुरक्षित रखने और तय संग्रह तक पहुँचाने की व्यवस्था देखी।
दो दिन बाद सफाई दल आया। नीलिमा ने उन्हें सही स्थान बताया। भीतर की जाँच और सफाई का काम संबंधित कर्मियों ने किया। बाजार वालों ने सड़क खोलकर स्वयं कुछ करने की कोशिश नहीं की। नीलिमा ने देखा कि एक कर्मचारी बार बार सामान हटाने के लिए लोगों को कह रहा है। उसने अपनी दुकान का रखा डिब्बा पीछे किया और पड़ोसी से भी रास्ता देने को कहा। मदद केवल तस्वीर खींचकर खड़े रहने से नहीं थी। जरूरी काम के लिए जगह खाली रखना और कर्मियों की बात सुनना भी उसी का हिस्सा था।
काम पूरा होने के बाद किसी ने समूह में लिखा कि अब इस साल पानी नहीं रुकेगा। नीलिमा ने ऐसी घोषणा आगे नहीं बढ़ाई। उसे इतना ही पता था कि दिखाई दे रही रुकावट पर काम हुआ है। बारिश का पानी रुकने के और कारण हो सकते हैं। उसने नई स्थिति की तस्वीर रखी और कहा कि समस्या लौटे तो उसी स्थान की जानकारी के साथ फिर बताएँगे। अपने छोटे प्रयास को पूरे शहर की समस्या का अंतिम समाधान बना देने से अगले कदम की जरूरत छिप सकती थी। बाजार के लोगों को कोई जीत का प्रमाणपत्र नहीं चाहिए था; उन्हें रास्ते की वास्तविक हालत पर ध्यान देना था।
पहली बारिश में कुछ देर पानी आया और फिर उतर गया। सबने राहत की बात कही। उस दिन भी नीलिमा ने दुकान के बाहर जमा कागज देखा तो उसे यूँ ही बह जाने देने की जगह अपने कचरे के हिस्से में रखा। वह हर सड़क की निगरानी करने वाली व्यक्ति नहीं बन गई थी। उसका समय दुकान में जाता था और कई जरूरी काम अब भी छूटते थे। फर्क इतना था कि अपनी नजर के सामने दिख रही समस्या को केवल बरसात वाले दिन की शिकायत बनने तक छोड़ देना उसे ठीक नहीं लग रहा था।
अगले महीने जाली के पास फिर कुछ पत्ते जमा दिखे। इस बार खबर देना किसी एक व्यक्ति की आदत पर निर्भर नहीं रहा। पड़ोसी ने सूचना दी और जरूरत के अनुसार आगे जाँच माँगी। बाजार में बातें अभी भी कभी शिकायत से शुरू होती थीं, लेकिन उसके बाद स्थान, जिम्मेदारी और अगले कदम का प्रश्न भी आता था। नीलिमा के लिए उस मोड़ की छोटी सीख यही रही कि मुश्किल आने से पहले देखना केवल अनुमान लगाना नहीं है। सामने की स्थिति पहचानना, सही जगह जानकारी पहुँचाना और अपने हिस्से का कचरा सँभालना रोज के साधारण काम हैं। बारिश को कोई आदेश नहीं दिया जा सकता था, मगर उसके आने से पहले ध्यान का एक हिस्सा अपने हाथ में था।