चेचक उन्मूलन की सीख: आखिरी व्यक्ति तक पहुँचना केवल आँकड़ा पूरा करना नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के ऐतिहासिक विवरण पर आधारित विचार; आधुनिक उदाहरण काल्पनिक है
किसी वैश्विक उपलब्धि की घोषणा एक दिन होती है, लेकिन उसके पीछे अनेक स्थानों पर किया गया नियमित काम हो सकता है। चेचक उन्मूलन का इतिहास इसी प्रकार की सामूहिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। सफलता को केवल एक नाम या एक उपाय में समेट देने से उसकी पूरी प्रक्रिया दिखाई नहीं देती। उसमें वैज्ञानिक साधनों के साथ लोगों तक पहुँचना, सूचना जुटाना और स्थिति की पुष्टि करना भी आवश्यक था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के विवरण के अनुसार कई वर्षों तक दुनिया भर में व्यापक टीकाकरण और निगरानी का काम हुआ। 1980 में चेचक के उन्मूलन की घोषणा की गई। इस उपलब्धि को समझते समय रोग की पहचान, मामलों की जानकारी और लगातार निगरानी का महत्व भी देखना चाहिए। यहाँ चर्चा उस ऐतिहासिक अभियान से प्रेरित सार्वजनिक कार्य की दृष्टि की है। वर्तमान स्वास्थ्य संबंधी किसी व्यक्तिगत निर्णय की जगह यह इतिहास नहीं लेता।
घोषणा और वास्तविक स्थिति
किसी काम की रिपोर्ट अच्छी दिखना और जमीन पर काम पूरा होना हमेशा एक बात नहीं। बड़े लक्ष्य में उन लोगों का पता लगाना कठिन हो सकता है जो सामान्य संपर्क से बाहर रहते हैं। यदि उपलब्ध जानकारी ही अधूरी हो, तो प्रतिशत का आकर्षक दिखना भ्रम पैदा कर सकता है। इसलिए जिम्मेदार व्यवस्था केवल दर्ज सफलता नहीं, छूटी हुई जानकारी भी खोजती है।
एक काल्पनिक उदाहरण में बाढ़ के बाद राहत सामग्री बाँटने वाली समिति ने सूची में अधिकांश घरों के सामने निशान लगा दिए थे। स्वयंसेविका सृष्टि ने पूछा कि नदी के दूसरी ओर रहने वाले चार परिवार कहाँ दर्ज हैं। किसी ने कहा कि वे गाँव की मुख्य सूची में नहीं आते। प्रश्न छोटा था, लेकिन उससे पता चला कि रिपोर्ट का लगभग पूरा होना कुछ लोगों के लिए पूरी तरह बाहर छूट जाना भी हो सकता है।
सृष्टि ने तुरंत स्वयं जोखिम लेकर नदी पार नहीं की। समिति ने स्थानीय जिम्मेदार लोगों और सुरक्षित उपलब्ध साधनों के साथ संपर्क का तरीका बनाया। पहले वास्तविक जरूरत की पुष्टि हुई, फिर वितरण का प्रबंध। इस कथा का उद्देश्य किसी स्वास्थ्य अभियान की विधि सिखाना नहीं। यह केवल उस अंतर को दिखाती है जो कुल संख्या और व्यक्ति तक पहुँचने के बीच हो सकता है।
विश्वास भी व्यवस्था का हिस्सा है
सार्वजनिक काम में केवल सूचना देना पर्याप्त नहीं। लोग पूछ सकते हैं कि यह जानकारी क्यों चाहिए और उसका उपयोग किसलिए होगा। उनके प्रश्नों का सम्मानपूर्वक उत्तर देना सहयोग का आधार बन सकता है। यदि हर संकोच को अज्ञान कहकर दबा दिया जाए, तो संपर्क कठिन हो सकता है। स्पष्टता और संवेदना प्रशासनिक काम से अलग सजावट नहीं, उसकी गुणवत्ता का हिस्सा हैं।
साथ ही भरोसे का अर्थ बिना जाँच किसी भी दावे को मान लेना नहीं। सही जानकारी और योग्य संस्थागत मार्गदर्शन आवश्यक हैं। विज्ञान संबंधी प्रश्न को केवल लोकप्रिय भावना से तय नहीं किया जा सकता। अच्छे संवाद में प्रमाण और मनुष्य, दोनों के लिए जगह होती है। इस संतुलन से सार्वजनिक प्रयास अधिक जिम्मेदार बन सकता है।
नियमित काम का कम दिखाई देना
हम असाधारण घटनाओं के नायक जल्दी याद कर लेते हैं। रोज सूची ठीक करने, रिपोर्ट भेजने और दूर की सूचना जाँचने वाले लोगों का काम कम आकर्षक लगता है। लेकिन बड़े अभियान की विश्वसनीयता ऐसे अनेक चरणों पर निर्भर हो सकती है। एक छोटी गलत प्रविष्टि आगे के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। इसलिए नियमित काम में सावधानी भी गंभीर योगदान है।
किसी संस्था में यही बात शिकायतों की सुनवाई पर लागू होती है। शिकायत दर्ज कर लेना और उसका समाधान होने की पुष्टि अलग चरण हैं। केवल बंद लिख देने से पीड़ित व्यक्ति की कठिनाई समाप्त नहीं होती। प्रक्रिया में बाद की जाँच की जगह हो तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। संख्या काम का संकेत दे सकती है, उसका पूरा मानवीय अर्थ नहीं।
सीख को विनम्र रखना
चेचक उन्मूलन की सफलता से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि हर वैश्विक समस्या उसी प्रकार और उतने ही समय में हल हो जाएगी। समस्याओं की प्रकृति, साधन और सामाजिक परिस्थितियाँ अलग होती हैं। इतिहास प्रेरणा दे सकता है, तैयार सार्वभौमिक नुस्खा नहीं। उसकी वास्तविक उपलब्धि को समझना अधिक उपयोगी है, बजाय उससे हर क्षेत्र के लिए अतिरंजित वादा बनाने के।
फिर भी इस स्मृति से एक प्रश्न हमारे काम में रह सकता है: जिनके लिए व्यवस्था बनी है, क्या वे सचमुच उसमें दिखाई दे रहे हैं? आखिरी व्यक्ति का अर्थ केवल सूची की अंतिम पंक्ति नहीं। वह वह व्यक्ति भी हो सकता है जो अभी हमारी सूची में आया ही नहीं। सफलता की जिम्मेदार समझ ऐसे अदृश्य हिस्सों को खोजने का धैर्य भी रखती है।
संदर्भ और आगे पढ़ें
1. विश्व स्वास्थ्य संगठन: Smallpox, वैश्विक निगरानी और 1980 का उन्मूलन
https://www.who.int/emergencies/situations/smallpox
चित्र संबंधी सूचना: थंबनेल इस लेख के लिए बनाया गया कल्पनात्मक चित्रांकन है; इसे वास्तविक घटना का फोटोग्राफ या ऐतिहासिक व्यक्ति का प्रमाणित चित्र न मानें।