यह मिट्टी नहीं हमारी पहचान है।
जब हम अपने देश के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे सामने एक नक्शा आता है, कुछ झंडे लहराते दिखते हैं या हम राष्ट्रगान की धुन सुनने लगते हैं। लेकिन क्या भारत केवल जमीन का एक टुकड़ा है? क्या यह सिर्फ लकीरों से घिरा हुआ एक भूगोल है? तार्किक रूप से देखें तो नहीं। भारत वह मिट्टी है जिससे हमारा यह शरीर बना है। विज्ञान कहता है कि मनुष्य का शरीर उन्हीं तत्वों से बनता है जो उसके आसपास की प्रकृति में होते हैं। इसका मतलब है कि आपकी रगों में जो खून दौड़ रहा है, वह इसी देश के अन्न से बना है। आपकी हड्डियों में जो मजबूती है, वह इसी मिट्टी के कैल्शियम से आई है। जिस हवा में आप आज सांस ले रहे हैं, वही हवा हजारों साल पहले इस देश के ऋषियों, महापुरुषों और हमारे पूर्वजों के फेफड़ों से होकर गुजरी है। हम और हमारा देश दो अलग चीजें नहीं हैं; हम इस मिट्टी के चलते-फिरते हिस्से हैं। जब हम अपने देश पर गर्व करते हैं, तो वास्तव में हम अपनी जड़ों पर गर्व कर रहे होते हैं। दुनिया में बहुत से देश हैं जो बहुत अमीर हैं, जिनके पास ऊंची इमारतें हैं, लेकिन भारत के पास वह 'आत्मा' है जो बाजार में नहीं खरीदी जा सकती। यह वह भूमि है जिसने दुनिया को तब ज्ञान दिया जब बाकी सभ्यताएं बोलना सीख रही थीं। हमने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया, क्योंकि हमारे तर्क में 'विजय' का अर्थ दूसरों को गुलाम बनाना नहीं, बल्कि उनके दिलों को जीतना था।
जरा सोचिए, उस किसान के बारे में जो चिलचिलाती धूप में खेत जोतता है। उसके माथे से गिरने वाली पसीने की हर बूंद इस मिट्टी में मिल जाती है और फिर वही मिट्टी हमें अनाज देती है। वह किसान केवल खेती नहीं कर रहा, वह इस देश की आयु बढ़ा रहा है। हमारे देश का गर्व उन ऊंची इमारतों में नहीं, बल्कि उस गांव की चौखट पर है जहाँ आज भी एक अजनबी को देखकर कोई अपना दरवाजा बंद नहीं करता, बल्कि उसे पानी पिलाता है और सम्मान के साथ बैठाता है। यह 'अतिथि देवो भव' केवल एक वाक्य नहीं है, यह हमारा वह संस्कार है जो हमें पूरी दुनिया से अलग बनाता है। हमने शून्य दिया ताकि दुनिया गिनती सीख सके, हमने योग दिया ताकि दुनिया स्वस्थ रह सके, और हमने अहिंसा का विचार दिया ताकि दुनिया विनाश से बच सके। हमारा गर्व इस बात पर है कि हम उस परंपरा के वारिस हैं जिसने 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी पूरी दुनिया को एक परिवार माना। यह विचार पाखंड नहीं है, बल्कि एक बहुत ऊँचा तर्क है जो कहता है कि अगर हम सब एक ही ब्रह्मांड का हिस्सा हैं, तो फिर भेदभाव कैसा? भारत की मिट्टी में वह जादू है कि यहाँ आकर पत्थर भी भगवान बन जाते हैं और नदियाँ माँ बन जाती हैं। यह अंधविश्वास नहीं है, यह प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता है। हम जानते हैं कि अगर गंगा नहीं होगी, तो हमारा अस्तित्व सूख जाएगा, इसलिए हम उसे पूजते हैं।
जब हम सीमा पर खड़े उस जवान के बारे में सोचते हैं, जो शून्य से नीचे के तापमान में बर्फ पर खड़ा है, तो हमें अहसास होता है कि देश प्रेम कोई किताबी शब्द नहीं है। वह जवान वहां इसलिए नहीं खड़ा है कि उसे अच्छी तनख्वाह मिलती है, बल्कि वह इसलिए खड़ा है क्योंकि उसे पता है कि उसके पीछे करोड़ों भाई-बहन चैन की नींद सो रहे हैं। उसकी आँखों में जो चमक है, वह तिरंगे के सम्मान की चमक है। क्या कभी आपने सोचा है कि तिरंगे के तीन रंग हमारे दिल में इतनी हलचल क्यों पैदा करते हैं? क्योंकि वह केसरिया रंग उन हजारों क्रांतिकारियों के खून की याद दिलाता है जिन्होंने हँसते-हँसते फांसी के फंदे को चूम लिया ताकि हम आज आजाद हवा में सांस ले सकें। वे पागल नहीं थे, वे बहुत तार्किक थे। उन्हें पता था कि एक व्यक्ति मर सकता है, लेकिन उसके विचार और उसका देश अमर रहना चाहिए। आज हम जो मोबाइल चलाते हैं, जिन कारों में घूमते हैं, यह सब हमें बहुत छोटा लगने लगेगा अगर हम एक पल के लिए उन लोगों के बलिदान को याद करें। हमारा देश केवल इतिहास की किताबों में नहीं है, वह हमारे चरित्र में होना चाहिए। जब आप सड़क पर चलते हुए किसी गरीब की मदद करते हैं, जब आप अपनी भाषा का सम्मान करते हैं, या जब आप ईमानदारी से अपना काम करते हैं, तब आप असल में अपने देश की सेवा कर रहे होते हैं।
अक्सर लोग कहते हैं कि देश में बहुत समस्याएं हैं, बहुत गरीबी है, बहुत गंदगी है। लेकिन क्या आपने कभी अपनी माँ को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वह बीमार थी या बूढ़ी हो गई थी? नहीं। तो फिर देश के साथ ऐसा व्यवहार क्यों? देश तो वह माँ है जो हमें सब कुछ देती है और बदले में कुछ नहीं मांगती। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है। यहाँ कोस-कोस पर पानी बदलता है और चार कोस पर वाणी, फिर भी हम सब एक धागे में पिरोए हुए हैं। एक मंदिर की घंटी और एक मस्जिद की अजान जब एक ही हवा में गूँजती है, तो वह भारत की असली तस्वीर होती है। हमारे बच्चे जब स्कूल में 'जन गण मन' गाते हैं, तो उनकी नन्हीं आँखों में जो चमक होती है, वही इस देश का भविष्य है। हमें बच्चों को यह सिखाना होगा कि भारत केवल एक नाम नहीं है, यह एक जिम्मेदारी है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस जमीन पर पैदा हुए जहाँ राम ने मर्यादा सिखाई, कृष्ण ने कर्म सिखाया और बुद्ध ने शांति सिखाई। यह वह भूमि है जहाँ कबीर, नानक और विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाया।
आज दुनिया भारत की ओर देख रही है, इसलिए नहीं कि हमारे पास परमाणु बम है, बल्कि इसलिए कि हमारे पास वह मानसिक शांति और परिवारिक संस्कार हैं जो पश्चिम के अमीर देशों के पास भी नहीं हैं। हमारे यहाँ आज भी बच्चा बड़ा होकर अपने माता-पिता के पैर छूता है, यह संस्कार ही हमारी सबसे बड़ी पूँजी है। जिस दिन हम अपनी संस्कृति को भूलकर दूसरों की नकल करने लगेंगे, उस दिन हम अपना आधार खो देंगे। गौरव इस बात में नहीं है कि हम कितना पैसा कमाते हैं, गौरव इस बात में है कि हम अपने देश के लिए क्या छोड़कर जाते हैं। जब आप विदेश जाते हैं और कोई आपसे पूछता है कि आप कहाँ से हैं, और जब आप गर्व से कहते हैं "मैं भारतीय हूँ", तो उस एक वाक्य के पीछे पांच हजार साल की सभ्यता खड़ी होती है। उस समय आपकी पहचान केवल आपकी नहीं होती, आपके साथ हिमालय की ऊंचाई और समुद्र की गहराई भी होती है।
प्रमाण यह है कि जब भी दुनिया पर कोई संकट आया है, भारत ने हमेशा हाथ बढ़ाया है। हमने दवाइयां दी हैं, हमने ज्ञान दिया है और हमने हमेशा शांति की बात की है। यह हमारे डीएनए में है। आँसू तब आते हैं जब हम देखते हैं कि जिस देश को हमारे पूर्वजों ने अपने खून से सींचा, आज उसी देश में कुछ लोग इसे तोड़ने की बात करते हैं। लेकिन भारत इतना कमजोर नहीं है। इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। यह मिट्टी उन करोड़ों माताओं की दुआओं से बनी है जिन्होंने अपने बेटों को युद्ध के मैदान में भेज दिया। यह मिट्टी उन बहनों की राख से बनी है जिन्होंने अपने सम्मान के लिए जौहर कर लिया। भारत एक जीता-जागता एहसास है। इसे समझने के लिए दिमाग नहीं, दिल चाहिए।
अंत में, बस इतना ही याद रखिये कि हम इस देश के मालिक नहीं हैं, हम इसके रक्षक हैं। हमें यह देश हमारे पूर्वजों से विरासत में मिला है और हमें इसे अपनी आने वाली पीढ़ियों को और भी सुंदर और मजबूत बनाकर सौंपना है। जिस दिन आप तिरंगे को ऊँचा उठते देखें और आपकी आँखों के किनारे गीले हो जाएं, समझ लीजियेगा कि आप अपनी मिट्टी के प्रति वफादार हैं। भारत सिर्फ हमारा देश नहीं है, यह हमारी पहचान है, हमारा गौरव है और हमारा एकमात्र घर है। अगर भारत है, तो हम हैं; वरना हमारी कोई पहचान नहीं। इस मिट्टी को नमन कीजिये, क्योंकि यही वह जगह है जहाँ हम पैदा हुए, जहाँ हम बढ़े और एक दिन इसी मिट्टी में हमें मिल जाना है। इस शाश्वत सत्य से बड़ा कोई तर्क नहीं और इस प्रेम से बढ़कर कोई भावना नहीं। भारत माता की गोद में जो सुकून है, वह दुनिया के किसी भी कोने में नहीं मिल सकता। हमें गर्व है, हमें नाज है, और हम धन्य हैं कि हम भारतीय हैं।
जरा सोचिए, उस किसान के बारे में जो चिलचिलाती धूप में खेत जोतता है। उसके माथे से गिरने वाली पसीने की हर बूंद इस मिट्टी में मिल जाती है और फिर वही मिट्टी हमें अनाज देती है। वह किसान केवल खेती नहीं कर रहा, वह इस देश की आयु बढ़ा रहा है। हमारे देश का गर्व उन ऊंची इमारतों में नहीं, बल्कि उस गांव की चौखट पर है जहाँ आज भी एक अजनबी को देखकर कोई अपना दरवाजा बंद नहीं करता, बल्कि उसे पानी पिलाता है और सम्मान के साथ बैठाता है। यह 'अतिथि देवो भव' केवल एक वाक्य नहीं है, यह हमारा वह संस्कार है जो हमें पूरी दुनिया से अलग बनाता है। हमने शून्य दिया ताकि दुनिया गिनती सीख सके, हमने योग दिया ताकि दुनिया स्वस्थ रह सके, और हमने अहिंसा का विचार दिया ताकि दुनिया विनाश से बच सके। हमारा गर्व इस बात पर है कि हम उस परंपरा के वारिस हैं जिसने 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी पूरी दुनिया को एक परिवार माना। यह विचार पाखंड नहीं है, बल्कि एक बहुत ऊँचा तर्क है जो कहता है कि अगर हम सब एक ही ब्रह्मांड का हिस्सा हैं, तो फिर भेदभाव कैसा? भारत की मिट्टी में वह जादू है कि यहाँ आकर पत्थर भी भगवान बन जाते हैं और नदियाँ माँ बन जाती हैं। यह अंधविश्वास नहीं है, यह प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता है। हम जानते हैं कि अगर गंगा नहीं होगी, तो हमारा अस्तित्व सूख जाएगा, इसलिए हम उसे पूजते हैं।
जब हम सीमा पर खड़े उस जवान के बारे में सोचते हैं, जो शून्य से नीचे के तापमान में बर्फ पर खड़ा है, तो हमें अहसास होता है कि देश प्रेम कोई किताबी शब्द नहीं है। वह जवान वहां इसलिए नहीं खड़ा है कि उसे अच्छी तनख्वाह मिलती है, बल्कि वह इसलिए खड़ा है क्योंकि उसे पता है कि उसके पीछे करोड़ों भाई-बहन चैन की नींद सो रहे हैं। उसकी आँखों में जो चमक है, वह तिरंगे के सम्मान की चमक है। क्या कभी आपने सोचा है कि तिरंगे के तीन रंग हमारे दिल में इतनी हलचल क्यों पैदा करते हैं? क्योंकि वह केसरिया रंग उन हजारों क्रांतिकारियों के खून की याद दिलाता है जिन्होंने हँसते-हँसते फांसी के फंदे को चूम लिया ताकि हम आज आजाद हवा में सांस ले सकें। वे पागल नहीं थे, वे बहुत तार्किक थे। उन्हें पता था कि एक व्यक्ति मर सकता है, लेकिन उसके विचार और उसका देश अमर रहना चाहिए। आज हम जो मोबाइल चलाते हैं, जिन कारों में घूमते हैं, यह सब हमें बहुत छोटा लगने लगेगा अगर हम एक पल के लिए उन लोगों के बलिदान को याद करें। हमारा देश केवल इतिहास की किताबों में नहीं है, वह हमारे चरित्र में होना चाहिए। जब आप सड़क पर चलते हुए किसी गरीब की मदद करते हैं, जब आप अपनी भाषा का सम्मान करते हैं, या जब आप ईमानदारी से अपना काम करते हैं, तब आप असल में अपने देश की सेवा कर रहे होते हैं।
अक्सर लोग कहते हैं कि देश में बहुत समस्याएं हैं, बहुत गरीबी है, बहुत गंदगी है। लेकिन क्या आपने कभी अपनी माँ को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वह बीमार थी या बूढ़ी हो गई थी? नहीं। तो फिर देश के साथ ऐसा व्यवहार क्यों? देश तो वह माँ है जो हमें सब कुछ देती है और बदले में कुछ नहीं मांगती। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है। यहाँ कोस-कोस पर पानी बदलता है और चार कोस पर वाणी, फिर भी हम सब एक धागे में पिरोए हुए हैं। एक मंदिर की घंटी और एक मस्जिद की अजान जब एक ही हवा में गूँजती है, तो वह भारत की असली तस्वीर होती है। हमारे बच्चे जब स्कूल में 'जन गण मन' गाते हैं, तो उनकी नन्हीं आँखों में जो चमक होती है, वही इस देश का भविष्य है। हमें बच्चों को यह सिखाना होगा कि भारत केवल एक नाम नहीं है, यह एक जिम्मेदारी है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस जमीन पर पैदा हुए जहाँ राम ने मर्यादा सिखाई, कृष्ण ने कर्म सिखाया और बुद्ध ने शांति सिखाई। यह वह भूमि है जहाँ कबीर, नानक और विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाया।
आज दुनिया भारत की ओर देख रही है, इसलिए नहीं कि हमारे पास परमाणु बम है, बल्कि इसलिए कि हमारे पास वह मानसिक शांति और परिवारिक संस्कार हैं जो पश्चिम के अमीर देशों के पास भी नहीं हैं। हमारे यहाँ आज भी बच्चा बड़ा होकर अपने माता-पिता के पैर छूता है, यह संस्कार ही हमारी सबसे बड़ी पूँजी है। जिस दिन हम अपनी संस्कृति को भूलकर दूसरों की नकल करने लगेंगे, उस दिन हम अपना आधार खो देंगे। गौरव इस बात में नहीं है कि हम कितना पैसा कमाते हैं, गौरव इस बात में है कि हम अपने देश के लिए क्या छोड़कर जाते हैं। जब आप विदेश जाते हैं और कोई आपसे पूछता है कि आप कहाँ से हैं, और जब आप गर्व से कहते हैं "मैं भारतीय हूँ", तो उस एक वाक्य के पीछे पांच हजार साल की सभ्यता खड़ी होती है। उस समय आपकी पहचान केवल आपकी नहीं होती, आपके साथ हिमालय की ऊंचाई और समुद्र की गहराई भी होती है।
प्रमाण यह है कि जब भी दुनिया पर कोई संकट आया है, भारत ने हमेशा हाथ बढ़ाया है। हमने दवाइयां दी हैं, हमने ज्ञान दिया है और हमने हमेशा शांति की बात की है। यह हमारे डीएनए में है। आँसू तब आते हैं जब हम देखते हैं कि जिस देश को हमारे पूर्वजों ने अपने खून से सींचा, आज उसी देश में कुछ लोग इसे तोड़ने की बात करते हैं। लेकिन भारत इतना कमजोर नहीं है। इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। यह मिट्टी उन करोड़ों माताओं की दुआओं से बनी है जिन्होंने अपने बेटों को युद्ध के मैदान में भेज दिया। यह मिट्टी उन बहनों की राख से बनी है जिन्होंने अपने सम्मान के लिए जौहर कर लिया। भारत एक जीता-जागता एहसास है। इसे समझने के लिए दिमाग नहीं, दिल चाहिए।
अंत में, बस इतना ही याद रखिये कि हम इस देश के मालिक नहीं हैं, हम इसके रक्षक हैं। हमें यह देश हमारे पूर्वजों से विरासत में मिला है और हमें इसे अपनी आने वाली पीढ़ियों को और भी सुंदर और मजबूत बनाकर सौंपना है। जिस दिन आप तिरंगे को ऊँचा उठते देखें और आपकी आँखों के किनारे गीले हो जाएं, समझ लीजियेगा कि आप अपनी मिट्टी के प्रति वफादार हैं। भारत सिर्फ हमारा देश नहीं है, यह हमारी पहचान है, हमारा गौरव है और हमारा एकमात्र घर है। अगर भारत है, तो हम हैं; वरना हमारी कोई पहचान नहीं। इस मिट्टी को नमन कीजिये, क्योंकि यही वह जगह है जहाँ हम पैदा हुए, जहाँ हम बढ़े और एक दिन इसी मिट्टी में हमें मिल जाना है। इस शाश्वत सत्य से बड़ा कोई तर्क नहीं और इस प्रेम से बढ़कर कोई भावना नहीं। भारत माता की गोद में जो सुकून है, वह दुनिया के किसी भी कोने में नहीं मिल सकता। हमें गर्व है, हमें नाज है, और हम धन्य हैं कि हम भारतीय हैं।