पुस्तकालय
सदाचारकथावलिः
संस्कृतनीतिकथामंजरी
संस्कृतकथासौरभम्
संस्कृतकथासरिता
संस्कृतकथामाधुरी
संस्कृतकथामन्दाकिनी
संस्कृतकथामणिदीपिका
संस्कृतकथाचन्द्रिका
संस्कृतकथाकौमुदी
विवेकपरीक्षा
रसनीतिकथाकौमुदी
यथा तथा
परोपकारी
नीतिबोधकथामाला
नीतिकथारत्नावली
नीतिकथामृतावलिः
नीतिकथामृतम्
नीतिकथामाधुरी
त्रयः मान्त्रिकाः
ज्ञानोदय
कथासुधाञ्जलिः
कथाविवेकमञ्जरी
कथाविवेकदीपिका
कथारसचन्द्रिका
कथारसकौमुदी
कथारत्नप्रदीपः
कथारत्नदीपिका
कथामौक्तिकमाला
कथामृतमञ्जरी
कथामृतकदम्बकम्
कथामाधुर्यदीपिका
कथाबोधतरङ्गिणी
कथाप्रज्ञामञ्जरी
कथाप्रज्ञाप्रभा
कथानीतिसुधा
कथाकौतुकमञ्जरी
कथाकौतुकप्रभा
आत्मचरित - उत्तरार्ध २
आत्मचरित - पूर्वार्ध २
आत्मचरित - पूर्वार्ध १
आत्मचरित - उत्तरार्ध १
आत्मचरित - पूना
आत्मचरित - अंग्रेज़ी
आत्मचरित - हिन्दी
पत्र विज्ञापन - पुस्तक १ भाग २
पत्र विज्ञापन - पुस्तक १ भाग ३
पत्र विज्ञापन - पुस्तक १ भाग १
पत्र विज्ञापन - पुस्तक २ भाग २
पत्र विज्ञापन - पुस्तक २ भाग १
पत्र विज्ञापन - पुस्तक ३ भाग २
पत्र विज्ञापन - पुस्तक ३ भाग १
पत्र विज्ञापन - पुस्तक ४ भाग १
पत्र विज्ञापन - पुस्तक ४ भाग २
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ६
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक १ भाग १
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक १ भाग २
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ८ भाग १
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ८ भाग २
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ९
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ७ भाग २
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ७ भाग १
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक २ भाग १
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक २ भाग २
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ५
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ४
ऋग्वेद भाष्य - पुस्तक ३
सत्यार्थप्रकाश - अंग्रेज़ी - चिरंजीव
सत्यार्थप्रकाश - अंग्रेज़ी - दुर्गाप्रसाद
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास ८
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास ९
सत्यार्थप्रकाश - स्वमन्तव्य
सत्यार्थप्रकाश - भूमिका
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास ७
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास १२
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास १३
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास ६
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास ४
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास ११
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास १०
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास ५
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास १
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास १४
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास २
सत्यार्थप्रकाश - समुल्लास ३
सत्यार्थप्रकाश - उर्दू
सत्यार्थप्रकाश - पंजाबी
सत्यार्थप्रकाश - कन्नड़
सत्यार्थप्रकाश - असमिया
सत्यार्थप्रकाश - नेपाली
सत्यार्थप्रकाश - फ्रेंच
सत्यार्थप्रकाश - जर्मन
सत्यार्थप्रकाश - मलयालम
सत्यार्थप्रकाश - डच
सत्यार्थप्रकाश - मराठी
सत्यार्थप्रकाश - थाई
सत्यार्थप्रकाश - संस्कृत
सत्यार्थप्रकाश - तेलुगु
सत्यार्थप्रकाश - बंगाली
सत्यार्थप्रकाश - ओड़िया
सत्यार्थप्रकाश - चीनी
सत्यार्थप्रकाश - गुजराती
सत्यार्थप्रकाश - सिंधी
सत्यार्थप्रकाश - तमिल
सत्यार्थप्रकाश - स्वाहिली
सत्यार्थप्रकाश - बर्मी
सत्यार्थप्रकाश - हिन्दी १८९९
सत्यार्थप्रकाश - नेपाली परिमार्जित
यजुर्वेद भाष्य - चार भाग
ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका
आर्य पर्व पद्धति
संस्कृत वाक्यप्रबोध
संस्कारविधि
गोकरुणानिधि
चतुर्वेद विषयसूची
भ्रान्ति निवारण
सामवेद मन्त्रानुक्रम
आर्योदेश्यरत्नमाला
पंचमहायज्ञविधि
स्वमन्तव्यामन्तव्य प्रकाश
भ्रमोच्छेदन
आर्याभिविनय
अनुभ्रमोच्छेदन
व्यवहारभानु
सन्धि विषय
नामिक
सौवर
वर्णोच्चारण शिक्षा
निघण्टु
धातुपाठ
अव्ययार्थ
गणपाठ
सामासिक
कारकीय
उणादिकोश
आख्यातिक
पारिभाषिक
स्त्रैणताद्धित
अष्टाध्यायी भाष्य - भाग ३
अष्टाध्यायी भाष्य - भाग २
अष्टाध्यायी भाष्य - भाग १
संस्कार चन्द्रिका
संस्कारविधि - दयानन्द
सत्यधर्म विचार
शिक्षापत्रीध्वान्त निवारण
उदयपुर शास्त्रार्थ
वेदविरुद्ध मतखण्डन
भागवत खण्डन
हुगली शास्त्रार्थ
पूना प्रवचन
मसूदा शास्त्रार्थ
अजमेर शास्त्रार्थ
काशी शास्त्रार्थ
विविध शास्त्रार्थ
बरेली शास्त्रार्थ
जालन्धर शास्त्रार्थ
वेदान्तध्वान्त निवारण
ऋग्वेद - मण्डल १
ऋग्वेद - मण्डल ३
ऋग्वेद - मण्डल २
ऋग्वेद - मण्डल ६
ऋग्वेद - मण्डल ७
ऋग्वेद - मण्डल ५
ऋग्वेद - मण्डल ४
ऋग्वेद - मण्डल ९
ऋग्वेद - मण्डल ८
ऋग्वेद - मण्डल १०
ऋग्वेद - अष्टक ३
ऋग्वेद - अष्टक २
ऋग्वेद - अष्टक १
ऋग्वेद - अष्टक ५
ऋग्वेद - अष्टक ४
ऋग्वेद - अष्टक ६
ऋग्वेद - अष्टक ७
ऋग्वेद - अष्टक ८
अथर्ववेद
शुक्लयजुर्वेद - काण्व
कृष्णयजुर्वेद - काठक
कृष्णयजुर्वेद - मैत्रायणी
शुक्लयजुर्वेद - माध्यन्दिन
कृष्णयजुर्वेद - तैत्तिरीय
सामवेद
काशिका - भाग १
काशिका - भाग २
काशिका - भाग ३
काशिका - भाग ६
काशिका - भाग ४
काशिका - भाग ५
भाषावृत्ति - परिचय
भाषावृत्ति - प्राक्कथन
भाषावृत्ति - शीर्षक
भाषावृत्ति - अध्याय २
भाषावृत्ति - अध्याय ४
भाषावृत्ति - अध्याय ६
भाषावृत्ति - अनुक्रमणिका
भाषावृत्ति - अध्याय ३
भाषावृत्ति - अध्याय ५
भाषावृत्ति - अध्याय १
लघुसिद्धान्तकौमुदी - तद्धित
लघुसिद्धान्तकौमुदी - अव्यय
लघुसिद्धान्तकौमुदी - कृदन्त
लघुसिद्धान्तकौमुदी - समास
लघुसिद्धान्तकौमुदी - स्त्रीप्रत्यय
याज्ञवल्क्य भाग-१
याज्ञवल्क्य भाग-२
नाट्यशास्त्र - अध्याय १५
नाट्यशास्त्र - अध्याय ३५
नाट्यशास्त्र - अध्याय २३
नाट्यशास्त्र - अध्याय १९
नाट्यशास्त्र - अध्याय १८
नाट्यशास्त्र - अध्याय २२
नाट्यशास्त्र - अध्याय १
नाट्यशास्त्र - अध्याय १४
नाट्यशास्त्र - अध्याय ३३
नाट्यशास्त्र - अध्याय २५
नाट्यशास्त्र - अध्याय ६
नाट्यशास्त्र - अध्याय २९
नाट्यशास्त्र - अध्याय १३
नाट्यशास्त्र - अध्याय १२
नाट्यशास्त्र - अध्याय २८
नाट्यशास्त्र - अध्याय २४
नाट्यशास्त्र - अध्याय ७
नाट्यशास्त्र - अध्याय २७
नाट्यशास्त्र - अध्याय ४
नाट्यशास्त्र - अध्याय ११
नाट्यशास्त्र - अध्याय ८
नाट्यशास्त्र - अध्याय ९
संगीतसमयसार
नाट्यशास्त्र - अध्याय १०
नाट्यशास्त्र - अध्याय ३०
नाट्यशास्त्र - अध्याय २६
नाट्यशास्त्र - अध्याय ५
नाट्यशास्त्र - अध्याय १७
नाट्यशास्त्र - अध्याय २१
नाट्यशास्त्र - अध्याय २
नाट्यशास्त्र - अध्याय ३७
नाट्यशास्त्र - अध्याय ३६
नाट्यशास्त्र - अध्याय २०
नाट्यशास्त्र - अध्याय ३
नाट्यशास्त्र - अध्याय १६
निघण्टु
निघण्टु निरुक्त - स्वरूप
निरुक्त दुर्गवृत्ति - भाग २
निघण्टु निरुक्त
निरुक्त दुर्गवृत्ति - भाग १
नीतिशतक
शृंगारशतक
वैराग्यशतक
ऐतरेय आरण्यक
छान्दोग्य आरण्यक
मैत्रायणीय आरण्यक
जैमिनीय आरण्यक
तैत्तिरीय आरण्यक
शांखायन आरण्यक
ऋग्वेद प्रातिशाख्य
अथर्ववेद प्रातिशाख्य
शुक्लयजुर्वेद प्रातिशाख्य
सामवेद प्रातिशाख्य
अथर्ववेद प्रातिशाख्य - चतुरध्यायी
साधक संजीवनी - अध्याय १५
साधक संजीवनी - अध्याय १
साधक संजीवनी - अध्याय १४
भगवद्गीता - संस्कृत
साधक संजीवनी - अध्याय १६
गीता - अध्याय १८
साधक संजीवनी - अध्याय २
साधक संजीवनी - अध्याय १७
साधक संजीवनी - अध्याय १३
साधक संजीवनी - अध्याय ७
साधक संजीवनी - अध्याय ६
साधक संजीवनी - अध्याय १२
साधक संजीवनी - भूमिका
साधक संजीवनी - अध्याय १०
साधक संजीवनी - अध्याय ४
साधक संजीवनी - अध्याय ५
साधक संजीवनी - अध्याय ११
भगवद्गीता
भगवद्गीता - मानक पाठ
साधक संजीवनी - अध्याय ८
साधक संजीवनी - अध्याय ९
साधक संजीवनी - अध्याय १८
भारतवर्ष इतिहास - खण्ड २ (१९२६)
भारतवर्ष इतिहास - खण्ड ३ (१९३३)
भारतवर्ष इतिहास - खण्ड १ (१९११)
भारतवर्ष इतिहास - खण्ड १ (१९१०)
मेघदूत
रघुवंश - सर्ग १६
रघुवंश - सर्ग १७
रघुवंश - सर्ग ९
रघुवंश - सर्ग १५
अभिज्ञानशाकुन्तलम्
रघुवंश - सर्ग १४
रघुवंश - सर्ग ८
रघुवंश - सर्ग १०
रघुवंश - सर्ग ११
रघुवंश - सर्ग १३
रघुवंश - सर्ग १२
रघुवंश - सर्ग ३
रघुवंश - सर्ग २
रघुवंश - सर्ग १
रघुवंश - सर्ग ५
रघुवंश - सर्ग १९
रघुवंश - सर्ग १८
रघुवंश - सर्ग ४
रघुवंश - सर्ग ६
कालिदास - जीवन और कृतियाँ
ऋतुसंहार
व्याकरण चन्द्रोदय - भाग ५
महाभाष्यदीपिका - आह्निक १
प्रारम्भिक रचनानुवाद कौमुदी
बृहद्धातुरूपावली
व्याकरण चन्द्रोदय - भाग २
महाभाष्यदीपिका - आह्निक ६
स्फोटवाद
धातुपाठ - सिंह
धातुपाठ
काशिका
उणादिकोश
स्फोटसिद्धि
कौटिलीय अर्थशास्त्र
सभाष्य भाग-१
सभाष्य भाग-२
कौटिल्य अर्थशास्त्र
सभाष्य भाग-३
सिद्धान्तविन्दु क
ब्रह्मसूत्र अध्याय ३.२-४
शंकरदिग्विजय
गीताभाष्य अध्याय १-९
ऐतरेय
भाष्यार्थ रत्नमाला
गीताभाष्य अध्याय १०-१८
भगवतगीता
छान्दोग्य , आङ्ग्ल
विष्णुसहस्रनाम और सनत्सुजातीय
शंकरपादभूषणं भाग-१
व्याख्यात्रयोपेतं
पञ्चदशी क
विवेक चूडामणी
कायपरिशुद्धि
सदीपिका
आनन्दगिरि टीकासह भाग-२
शांकरभाष्य भामतिटीकासह
मूल भाष्य
बृहदारण्यक
ईश
अद्वैतामोद
सिद्धन्तलेशसंग्रह
माण्डुक्य
तत्त्व बोध ( अद्वेतवाद )
मुण्डक
श्रुतिसारसमुद्धरण
ब्रह्मसूत्राणि
ब्रह्मसूत्र अध्याय १
वाक्यवृत्ति
छान्दोग्य
पञ्चदशी ख
ब्रह्मसूत्र अध्याय २-३.१
गौडपाद कारिका
केन
शंकरपादभूषणं भाग-२
शंकरविजय
कठ
आनन्दगिरि टीकासह भाग-१
अद्वैत सिद्धि सिद्धान्त
भामती वनारस सस्करण
सिद्धान्तविन्दु ख
प्रश्न
तैतिरिय
पञ्चदशी ग
महाभारत - कर्णपर्व
महाभारत - आदिपर्व
महाभारत - अनुशासनपर्व
महाभारत - अश्वमेधपर्व
महाभारत - सौप्तिकपर्व
महाभारत - शान्तिपर्व
महाभारत - स्त्रीपर्व
महाभारत - आश्रमवासपर्व
महाभारत - मौसलपर्व
महाभारत विषयसूची
महाभारत - विराटपर्व
महाभारत - सभापर्व
महाभारत - वनपर्व
महाभारत - महाप्रस्थानपर्व
महाभारत - उद्योगपर्व
महाभारत - स्वर्गारोहणपर्व
महाभारत - द्रोणपर्व
महाभारत - शल्यपर्व
महाभारत - भीष्मपर्व
वाक्यपदीयम् - काण्ड-३(२)
वाक्यपदीयम् - ब्रह्मकाण्ड,आङ्ग्ल
वाक्यपदीयम् - पदकण्ड
वाक्यपदीयम् - ब्रह्मकाण्ड,संस्कृत-आर्यभाषा
वाक्यपदीयम् - भाग-२
वाक्यपदीयम् - ब्रह्मकाण्ड,पाठनिर्णय
वाक्यपदीयम् - भाग-१
वाक्यपदीयम् - भाग-३-(२)
वाक्यपदीयम् - ब्रह्मकाण्ड,हिन्दी-संस्कृत-आङ्ग्ल
वाक्यपदीयम् - काण्ड-३
छान्दोग्य उपनिषद
ऐतरेय उपनिषद
श्वेताश्वतर उपनिषद
कौषीतकि उपनिषद
बृहदारण्यक उपनिषद
प्रश्न उपनिषद
मुण्डक उपनिषद
पैंगल उपनिषद
माण्डूक्य उपनिषद
महानारायण उपनिषद
तैत्तिरीय उपनिषद
ईश उपनिषद
केन उपनिषद
कठ उपनिषद
जाबाल उपनिषद
रामायण - बालकाण्ड
रामायण - अयोध्याकाण्ड
रामायण - उत्तरकाण्ड
रामायण - युद्धकाण्ड
रामायण - किष्किन्धाकाण्ड
रामायण - सुन्दरकाण्ड
रामायण - अरण्यकाण्ड
आश्वलायन स्मृति
कश्यप स्मृति
बौधायन स्मृति
शातातप स्मृति
लोहित स्मृति
विश्वामित्र स्मृति
मार्कण्डेय स्मृति
देवल स्मृति
भरद्वाज स्मृति
प्रजापति स्मृति
व्याघ्रपाद स्मृति
ऋष्यशृंग संहिता
दाल्भ्य स्मृति
स्मृति संग्रह
पुलस्त्य स्मृति
नारायण स्मृति
षड् दर्शन सूत्र
अष्टाध्यायी
गोकरुणानिधि - विकिस्रोत
सं.-ईश्वरचन्द्र
सं.उदयनारायण
आर्यवीर गीतांजलि
मीमांसा श्लोकवार्तिक - भाग २
षड्दर्शन
चरक सूत्रस्थान
सं-मधुसुदन सरस्वती
गुरुकुलं परिचय
यज्ञविधि
प्रगति पत्र
वैशेषिक दर्शन - राजाराम
न्यायभाष्य - वात्स्यायन
न्यायभाष्य - तैलंग
अवतारवाद मीमांसा
सर्वदर्शनसंग्रह मूल
छान्दोग्य ब्राह्मण
वंश ब्राह्मण
जैमिनीय ब्राह्मण
तैत्तिरीय ब्राह्मण
ऐतरेय ब्राह्मण
गोपथ ब्राह्मण
षड्विंश ब्राह्मण
नामनिधि - कवर सहित
अष्टाध्यायी - कवर सहित
भगवद्गीता - कवर सहित
सन्निधिसंग्रह
विचार एवं लेख
दरवाजे के पास छोटी कटोरी: कुणाल की सुबह का एक सरल आधार
सुबह बाहर निकलते समय कुणाल की चाबी फिर नहीं मिल रही थी। उसने मेज देखी, कुर्सी के नीचे देखा और पिछले दिन का बैग उलट दिया…
बारिश के बाद वाला नक्शा: ऐश्वर्या की प्रदर्शनी का नया रूप
मिट्टी के काम की खुली प्रदर्शनी के लिए ऐश्वर्या ने पूरा आँगन नापकर मेजों की जगह तय की थी। लोग भीतर आएँगे, एक ओर तैयार ब…
पोस्टर की अधूरी फाइल: आरुष ने अपनी उपलब्धता साफ कही
रंगमंच समूह की बैठक में आरुष ने फिर एक अतिरिक्त काम के लिए हाथ उठा दिया। इस सप्ताह उसे कार्यालय का जरूरी काम पूरा करना…
थैले में रखी कपड़े की पट्टी: प्रज्ञा को अपने अभ्यास का बदलाव दिखा
कढ़ाई की कक्षा में पहले दिन मिली छोटी कपड़े की पट्टी पर प्रज्ञा ने अपना नाम लिख लिया। उसे लगा था कि कुछ सप्ताह में वह स…
स्क्रीन की पाँच खिड़कियाँ: रोहित की सूची में कैसे बदला काम का क्रम
ग्राहक के लिए तैयार की जाने वाली सूची बनाते समय रोहित के सामने पाँच खिड़कियाँ खुली थीं। एक में वस्तुओं के नाम, दूसरी मे…
फोन से पहले खुली खिड़की: समीक्षा की सुबह में मिली छोटी जगह
सुबह आँख खुलते ही समीक्षा फोन उठाती और रात भर आए संदेश देखने लगती। किसी मित्र की तस्वीर, कार्यालय की चर्चा, खरीद का विज…
दस कामों में चार निशान: तुषार ने पूरे दिन का हिसाब देखा
दिन समाप्त होने पर तुषार अपनी सूची खोलता और सबसे पहले अधूरे काम गिनता। सुबह दस बातें लिखी थीं, रात को चार पर निशान था।…
टोकरी वहीं रखी रही: लावण्या की बालकनी के कुछ शांत मिनट
रविवार की सुबह लावण्या ने कोई काम नहीं रखा था। पिछले सप्ताह लगातार बाहर रहना पड़ा था और घर लौटते ही छोटे काम जमा मिलते…
डेढ़ घंटे बाद गलत श्रेणी: मयंक ने आवेदन की शुरुआत बदली
प्रतियोगिता के लिए आवेदन भेजने की अंतिम तारीख पास थी। मयंक ने सोचा कि जितनी जल्दी फॉर्म भर देगा, उतनी जल्दी बाकी काम शु…
तीन संदेश और एक अधूरी रात: हर्षिता ने समय पूछना शुरू किया
कार्यालय से लौटते समय हर्षिता के फोन पर तीन संदेश आए। एक मित्र ने कार्यक्रम का पोस्टर देख लेने को कहा था, दूसरे ने सप्त…
नई डायरी में धूल वाला डिब्बा: अदिति ने पहला मसौदा लिखना शुरू किया
नई डायरी का पहला पन्ना खोलते ही अदिति को लगता था कि यहाँ कुछ खास लिखा जाना चाहिए। सुंदर कवर, साफ कागज और अच्छी कलम के स…
गले मिलने से पहले की बातचीत: कबीर ने कहानी का अंत फिर लिखा
कहानी का अंतिम पन्ना लिखते समय कबीर हमेशा जल्दी करता था। शुरुआत में पात्र, जगह और छोटे संबंध बहुत ध्यान से बनाता, लेकिन…
अंतिम कुर्सी से देखा मंच: जाह्नवी की सजावट में बची जगह
पठन कार्यक्रम का मंच सजाने की जिम्मेदारी मिली तो जाह्नवी ने अपनी पसंद के सभी रंग एक साथ सोच लिए। पीछे बड़ा चित्र, सामने…
मेज पर लौटती स्केचबुक: इरा के दस मिनट के अभ्यास
तीन दिन के उत्साह में इरा ने नए रंग, कागज और ब्रश खरीद लिए थे। उसने तय किया कि रोज एक चित्र बनाएगी। पहले दिन देर रात तक…
दीवार की तस्वीर में छूटा नाम: अर्पित ने अपने योगदान की बात कही
विद्यालय की पुरानी दीवार पर बनने वाले सामुदायिक चित्र के लिए कई पूर्व विद्यार्थी रविवार को जुटे थे। सब वयस्क हो चुके थे…
एक छत पर दो कागज: मानसी और तेजस के चित्रों की अलग चाल
छत पर रखे पुराने गमलों का चित्र बनाने के लिए मानसी और तेजस एक ही समय बैठते थे। दोनों मित्र थे और पिछले महीने से सप्ताह…
दादी की धुन में बचा ठहराव: वेदिका की नई प्रस्तुति
घर की पुरानी रिकॉर्डिंग सुनते समय वेदिका को दादी की बनाई छोटी धुन मिली। उसमें शब्द कम थे और बीच बीच में कमरे की आवाजें…
फिल्म के बीच छूटा संबंध: विरल ने सफाई देने से पहले पूछा
छोटी फिल्म की पहली स्क्रीनिंग के बाद विरल ने दर्शकों के सामने खड़े होकर पूछा कि कैसी लगी। कमरे में कुछ लोगों ने अच्छी क…
रिकॉर्डिंग में केवल अपनी आवाज: अनिकेत ने समूह को सुनना सीखा
संगीत समूह में अनिकेत की पहचान तेज और स्पष्ट आवाज वाले गायक के रूप में थी। अभ्यास शुरू होता तो वह अपनी पंक्ति पूरे उत्स…
आठ पंक्तियों वाला कागज: तनय ने छोटी भूमिका को फिर पढ़ा
भूमिकाएँ बाँटने के बाद संचालक ने तनय को बुलाया तो वह मन ही मन मुख्य पात्र की आशा कर रहा था। पिछले वर्ष उसने संवाद अभ्या…
सौ तस्वीरों के बाद हवा का सवाल: इशिता ने यात्रा को थोड़ा ठहरकर देखा
यात्रा की पहली शाम से लौटकर इशिता ने फोन खोला तो उसमें सौ से अधिक तस्वीरें थीं। झील, सड़क, चाय की दुकान, होटल की खिड़की…
पठन कक्ष की तीन दिन की प्रदर्शनी: ओजस्वी को अपने शहर ने क्या दिखाया
चित्रों की प्रदर्शनी का विचार आया तो ओजस्वी ने पहले शहर से बाहर का नाम सोचा। उसे लगता था कि अच्छी कला देखने लोग बड़े के…
बंद शटर की दोपहर: तन्मय ने रंग बढ़ाने से पहले देखा
नए कैमरे के साथ तन्मय ने पहली बार पुराने बाजार की तस्वीरें लीं तो शाम भर उन्हें स्क्रीन पर चमकदार बनाता रहा। उसने दीवार…
कप का बदला हुआ कोण: रूपा ने अपनी रेखा देखनी शुरू की
रूपा की स्केचबुक के पहले पन्नों में छोटे घर, पत्तियाँ और चेहरों के अभ्यास थे। पिछले कुछ महीनों से वह एक लोकप्रिय कलाकार…
कहानी से बाहर रखी चाबी: चिराग ने नीरा का उत्तर सुना
लघुकथा की कार्यशाला में चिराग ने एक बस यात्रा का प्रसंग पढ़ा। कहानी में एक महिला अपने पुराने घर की चाबी लेकर नए शहर जा…
दस लोगों के सामने एक कविता: नायरा की डायरी से बाहर आई आवाज
पठन गोष्ठी के निमंत्रण पर नायरा ने अपना नाम तो लिख दिया था, लेकिन कविता चुनते समय हर पन्ना उसे बहुत निजी लगने लगा। उसकी…
गीत रोकने के दो मिनट बाद: आर्यन ने फिर शुरुआत की
संगीत सभा में अपना नाम सुनते ही आर्यन ने पानी का गिलास रख दिया। छोटे से कक्ष में परिचित चेहरे थे, फिर भी मंच तक जाते सम…
शीशे में किसी और की मुद्रा: अवनि ने अपने भाव का अभ्यास किया
नृत्य कक्ष की दीवार पर लगे बड़े शीशे में अवनि अपनी मुद्रा देख रही थी। अभ्यास का क्रम उसे याद था, लेकिन चेहरे पर हर बार…
तस्वीर से बाहर सुमेध: दक्ष ने अपनी नाटक मंडली को फिर देखा
नाटक समाप्त हुआ तो मंच पर खड़े कलाकारों के लिए देर तक तालियाँ बजती रहीं। मुख्य भूमिका निभाने वाले दक्ष ने झुककर दर्शकों…
कैनवास पर बचा आकाश: संध्या ने अधूरे चित्र को फिर देखा
संध्या ने कैनवास खिड़की के सामने रखा तो बाहर की रोशनी धीमी हो चुकी थी। रविवार को उसे अपनी पहली छोटी प्रदर्शनी के लिए ती…
रैकेट और बल्ले की एक शाम: तृषा के मैदान की नई समयसूची
रविवार की शाम खाली मैदान में रैकेट लेकर पहुँची तृषा ने देखा कि बीच की जगह पर क्रिकेट के लिए निशान बने हुए हैं। उसने पड़…
चाय के खर्च की पर्ची: इला और विशाल के बीच साफ हुई बात
पड़ोस के पुस्तक संवाद के लिए चाय और बैठने की व्यवस्था करने का काम इस बार इला ने लिया था। उसने एक परिचित दुकान से कुछ सा…
दीवार की खाली जगह: रिद्धि ने नमन को फोन किया
साझा प्रदर्शनी की तैयारी में रिद्धि पिछले तीन सप्ताह से सभी कलाकारों को समय पर चित्र भेजने की याद दिला रही थी। उसने कक्…
सब हँसे, समीर चुप हो गया: अभिनव का शुक्रवार वाला मजाक
कार्यालय की शुक्रवार वाली बैठक में इस बार किसी गंभीर प्रस्तुति की जगह हल्की बातचीत रखी गई थी। लोग अपने सप्ताह की छोटी घ…
मिट्टी के दो कटोरे: गरिमा ने मदद का ढंग बदला
मिट्टी के बर्तनों की छोटी कार्यशाला शुरू होने से पहले गरिमा ने कमरे में रखी मेजें गिनीं। पिछले सप्ताह ही उसने पड़ोस की…
नए घर के नीचे शतरंज की मेज: मानवेंद्र जी का बदलता परिचय
नई इमारत में पहले सप्ताह मानवेंद्र जी को अधिकतर लोग अंकल कहकर नमस्ते करते और आगे बढ़ जाते। इसमें कोई अशिष्टता नहीं थी,…
नलिन अपनी मेज पर बैठे रहे: चार्वी ने सूचना का रास्ता बदला
बैठक का स्थान बदलने की सूचना चार्वी ने कमरे में खड़े होकर बोल दी। लोगों ने सामान उठाया और दूसरी ओर जाने लगे। नलिन अपनी…
अपने पोस्टर के नीचे छिपी सूचना: हीरल ने बोर्ड का साझा स्थान देखा
सूचना पट्ट पर अपना पोस्टर लगाते समय हीरल ने किनारा थोड़ा बढ़ा दिया। नीचे का पुराना कागज आधा छिप गया। उसे लगा कि वह पिछल…
समूह में संदेश था, सीमा जी तक नहीं पहुँचा: अंजलि की नई सूची
उत्सव की तस्वीरें साझा हुईं तो सीमा जी ने पूछा कि कार्यक्रम कब हुआ था। अंजलि को आश्चर्य हुआ। निमंत्रण तो समूह में कई बा…
पठन कक्ष के बाहर डिब्बे: यामिका ने संदेश भेजने से पहले पूछा
पठन कक्ष के बाहर डिब्बे रखे देखकर यामिका रुक गई। दरवाजा आधा बंद था और भीतर से किताबें हटाई जा रही थीं। पास की दुकान वाल…
तीस कार्डों में गलत तारीख: आरुषि ने सुधार की बात साफ रखी
तीस निमंत्रण कार्ड खोलते ही आरुषि को तारीख गलत दिखी। कार्यक्रम चार दिन बाद था और आधे लोगों को कार्ड अभी देने थे। वह सीध…
खाली सीट पर बैठी युवती: अर्पित ने अनुमान रोक लिया
बस रुकी तो सामने की एक सीट खाली हुई। अर्पित बैठने को आगे बढ़ा, फिर पास खड़ी बुजुर्ग महिला से पूछा कि क्या वे बैठना चाहे…
एक गलत शब्द के बाद भी पूरी बात: हेमा की अगली प्रस्तुति
प्रस्तुति के तीसरे वाक्य में हेमा को सही शब्द याद नहीं आया। उसने दूसरा शब्द बोल दिया और मेज के उस ओर से हल्की हँसी आई।…
केवल एक शाम का डिब्बा: नूपुर ने सीढ़ी का मोड़ देखा
सीढ़ी के मोड़ पर रखा नूपुर का डिब्बा पहले केवल एक शाम के लिए बाहर आया था। फिर उसके पास दूसरा डिब्बा रखा गया। घर में अलम…
रितु ने तस्वीर से मना किया: सौम्या ने सहयोग का तरीका देखा
नई अभ्यास कॉपियाँ मेज पर रखी थीं। वयस्क अध्ययन समूह के लोग अपनी जरूरत के अनुसार उन्हें ले रहे थे। सौम्या ने फोन उठाया औ…
लेखिका के नाम के पीछे बँधे पन्ने: शैलजा ने कार्यशाला देखी
पहली बँधी हुई प्रति हाथ में आते ही शैलजा ने अपना नाम देखा। महीनों के लेख एक पुस्तक में आ गए थे। उसने पन्ने पलटे, आवरण क…
केवल सामने के दरवाजे तक: अमन ने मदद का आकार पूछा
फुटपाथ के किनारे थैला नीचे रखते हुए बुजुर्ग व्यक्ति ने पकड़ बदलने की कोशिश की। अमन ने उन्हें देखा और आगे निकल गया। कुछ…
उसने कहा, मेरा नाम करण है: मीरा की पुकार बदली
पठन कक्ष में नई किताबें पहुँचाने आया युवक डिब्बा रखकर सूची मिला रहा था। मीरा ने दूसरी ओर से आवाज दी कि छोटू, यह वाला ऊप…
स्वागत की पंक्ति से मेज तक: कृति ने पूरा रास्ता देखा
पठन कक्ष के दरवाजे पर लिखा था कि सभी पाठकों का स्वागत है। कृति को उस पंक्ति पर गर्व था। नए आयोजन के लिए उसने कुर्सियाँ…
वह आगे नहीं जा रहा था: संग्रहालय की कतार में प्रिया का अनुमान
संग्रहालय की प्रवेश कतार धीरे बढ़ रही थी। प्रिया अपनी घड़ी देख रही थी और सोच रही थी कि समय से पहुँचकर भी कितना इंतजार क…
मंच से उतरे गमले कहाँ गए: अद्विका ने वापसी की सूची जोड़ी
मंच के दोनों ओर लगाए गमले तस्वीर में बहुत सुंदर लग रहे थे। कबीर ने रोशनी की जाँच की और आयोजक को कहा कि इस बार पृष्ठभूमि…
रोपण वाले दिन के बाद: सोनाली की कक्षा ने पौधों को देखा
विद्यालय के छोटे बगीचे का पहला दिन रंगीन था। बच्चों ने गमलों के पास अपने बनाए कार्ड रखे और शिक्षिका सोनाली ने समूह की त…
बस की प्रतीक्षा में खिसकती छाँव: रीमा ने समय बदलकर देखा
बस आने में समय था और प्रतीक्षास्थल की छत की छाया बेंच तक नहीं पहुँच रही थी। रीमा ने पहले बेंच पर बैठना चाहा, फिर किनारे…
तस्वीर के बाद तीन रविवार: ईरा की साइकिल सच में बाहर आई
नए हेलमेट के साथ तस्वीर लेने के बाद ईरा ने साइकिल दीवार के पास लगा दी। अगले रविवार वह निकलने वाली थी। फिर बारिश की संभा…
दावत के बाद तीन भरे बर्तन: नैना ने मेन्यू के साथ आदत बदली
दावत के बाद मेज पर तीन बड़े बर्तन बचे थे। नैना ने ढक्कन उठाए तो उसे खाना बनाने की अपनी पूरी सुबह याद आई। इकतीस वर्ष की…
दौड़ते कदम और बेंच का मोड़: ऋतिका ने पार्क की दूसरी सुबह सुनी
पार्क के दूसरे चक्कर में ऋतिका को फिर रुकना पड़ा। रास्ते के मोड़ पर चार लोग खड़े होकर बात कर रहे थे। उसने जल्दी से किना…
टप, चुप्पी, फिर टप: मृणाल की सूची में अधूरा निशान
कैफे बंद होने के बाद पहली बार वह आवाज साफ सुनाई दी। टप, फिर थोड़ी चुप्पी, फिर टप। दिन भर मशीन, बातचीत और बर्तनों के बीच…
परदे की सुंदर तस्वीर के बाद: समीरा ने दिन की खिड़की देखी
सुंदर परदे लगने के बाद बैठक की तस्वीर बहुत अच्छी आई। समीरा ने मित्रों को भेजी तो सबने रंग की तारीफ की। कुछ दिनों बाद उस…
भूरे जूतों की खुली सिलाई: निखिल ने बदलने से पहले पूछा
अलमारी में रखे भूरे जूते निखिल को अपनी पहली नौकरी की याद दिलाते थे। वे अब रोज इस्तेमाल नहीं होते थे, लेकिन किसी बैठक मे…
अलमारी में सात थैले, दुकान पर खाली हाथ: माला ने जगह बदली
अलमारी के ऊपर वाले खाने से सात कपड़े के थैले निकले। कुछ किसी कार्यक्रम में मिले थे और कुछ माला ने खुद खरीदे थे। हर बार…
आखिरी ताली के बाद का मैदान: आकृति ने सूची पूरी की
रात के कार्यक्रम की आखिरी तस्वीर में सब मुस्करा रहे थे। मंच पर फूल थे, पीछे कपड़े की सजावट और सामने पुरस्कार लिए लोग। आ…
चमकते पानी वाली तस्वीर: अभय ने नदी पर अपना वाक्य बदला
नदी की तस्वीर में शाम की रोशनी सुंदर लग रही थी। अभय ने पुल के एक ओर से चित्र लिया और नीचे लिखा कि शहर की नदी फिर जीवित…
धुँधली तस्वीर से आगे: अनघा ने मुंडेर को समय दिया
खिड़की पर रखी छोटी दूरबीन पहली बार उस सुबह काम आई जब एक भूरे रंग की चिड़िया छत की मुंडेर पर बैठी। अनघा ने फोन उठाया और…
तस्वीर में पीछे खड़े कृष्णन: बगीचे के काम का सही परिचय
कॉलोनी के बगीचे की तस्वीर खिंची तो सबसे आगे समिति के तीन सदस्य खड़े थे। पीछे फूलों की क्यारी थी और उसके पास पानी की पाइ…
सिया की खाली बोतल और पार्क का बंद नल: आदत से आगे का प्रश्न
सुबह की सैर के बाद सिया ने अपनी स्टील की बोतल उठाई तो वह लगभग खाली थी। पार्क के कोने में बने पानी के स्थान पर गई, लेकिन…
स्टैंड रखने से पहले खाली दिखती छाँव: नवीन ने बेंच को देखा
दोपहर की बैठक में नवीन ने सुझाव रखा कि पुराने पेड़ के नीचे कॉलोनी का प्रदर्शन स्टैंड रखा जा सकता है। जगह साफ दिखती थी औ…
अलग रंग की नई पकड़: जूही का पुराना थैला फिर लौटा
कपड़े के पुराने थैले की पकड़ टूट गई तो जूही ने उसे दरवाजे के पास रख दिया। नए थैले की तस्वीर भी फोन में देख ली। अगले दिन…
दो डिब्बों की तस्वीर से आगे: नेहा ने संग्रह का तरीका समझा
नए दो डिब्बों की तस्वीर भेजते समय नेहा ने लिखा कि अब उनके घर का कचरा व्यवस्थित हो गया है। एक डिब्बे पर गीला और दूसरे पर…
पोस्टर के नीचे बंद जाली: नीलिमा ने बरसात से पहले देखा
दुकान का नया पोस्टर लगाते समय नीलिमा की नजर नीचे गई। फुटपाथ के किनारे पानी निकलने की जाली पर सूखे पत्ते, पैकिंग की पन्न…
एक गमले में तीन बार पानी: बालकनी की साझा देखभाल
साझा बालकनी में रखा गमला पहले दिन सबको अच्छा लगा। अन्वी ने पौधा खरीदा था और पड़ोसी कमलेश ने मिट्टी रखने की छोटी तश्तरी…
मौसी की मेज पर छोटा लिफाफा: तृषा ने धन्यवाद लिखा
लिफाफे पर मौसी का नाम लिखने के बाद तृषा ने भीतर का पन्ना फिर पढ़ा। धन्यवाद का एक साधारण संदेश लिखना उसे इतना कठिन लगेगा…
हर देरी पर वही छूटी ट्रेन: ईशान और रुचिका की आज की बात
घड़ी देखते हुए ईशान ने कहा कि फिर देर हो रही है, ठीक वैसे ही जैसे उस यात्रा में ट्रेन छूट गई थी। पत्नी रुचिका ने अलमारी…
यात्रा खत्म होने के बाद के बैग: लौटना सबका था, काम भी हुआ
यात्रा से लौटकर सबने कहा कि बहुत थक गए हैं। पिता सोफे पर बैठ गए, बेटा अपने कमरे में चला गया और माँ मधुरा ने चाय बनाने स…
अभी कविता नहीं सुनानी: रचना ने निहाल की बात मानी
मेहमान आते ही रचना ने बेटे को आवाज दी कि नई कविता सुनाओ। आठ वर्ष का निहाल दरवाजे के पास आकर रुक गया। उसने कहा कि अभी नह…
रविवार की तस्वीर से आगे: आदित्य ने रोज की रसोई सीखी
आदित्य ने रविवार को खाना बनाया तो परिवार ने खूब तस्वीरें लीं। उसकी बनाई साधारण सब्जी की जितनी चर्चा हुई, उतनी रोज माँ क…
सुंदर कहने से आगे: यामिनी के डिब्बे को सच में देखा गया
लकड़ी का छोटा डिब्बा मेज पर रखकर यामिनी ने पिता से पूछा कि उसका ढक्कन कैसा बैठ रहा है। पिता विनय ने डिब्बा घुमाकर देखा…
तस्वीर के पीछे भूरी पर्ची: नव्या ने मदद से पहले पूछा
पुरानी तस्वीरों की अलमारी खुली तो नव्या को रविवार का अच्छा काम मिल गया। वह सभी तस्वीरें स्कैन करके दादा के लिए फोन में…
तीन कप और चार तय बातें: साझा घर की छोटी सूची
साझा रसोई की मेज पर तीन कप रखे थे और तीनों के पास उनके बारे में अलग कहानी थी। रिद्धि को लगा कि वह सुबह अपना कप धो चुकी…
सूप के कटोरे के बीच अपनी बात: नायरा ने तुलना पर विराम माँगा
मौसी ने सूप का कटोरा लेते हुए कहा, अपनी चचेरी बहन को देखो, कितनी जल्दी सब सँभाल लेती है। नायरा ने मुस्कराकर कटोरा आगे क…
नई खिड़की पर पुराना गमला: मेघा ने शहर में अपना स्थान बनाया
नए फ्लैट की बालकनी में खड़े होकर मेघा ने गमला रखा और फिर उठा लिया। पुराने घर में वह सुबह की धूप वाली खिड़की पर रहता था।…
दरवाजा खुला, लैपटॉप भी: निशांत की घर लौटने वाली शाम
दरवाजा खुला तो निशांत ने कहा कि आज जल्दी घर आ गया है। उसने बैग सोफे के पास रखा, जूते उतारे और लैपटॉप खोल लिया। पत्नी पा…
अलमारी हटाने से पहले: कमरे का नक्शा सबने देखा
बैठक की पुरानी अलमारी हटाने के लिए मजदूर बुलाने की तारीख तय हो चुकी थी। अरुण ने पत्नी साक्षी और माँ से कहा कि अगले रविव…
कीबोर्ड के पास पिता की कॉपी: शेखर फिर विद्यार्थी बने
कीबोर्ड पर तीसरी बार उँगली गलत जगह गई तो शेखर ने हाथ पीछे कर लिया। बेटी तारा ने कहा कि उसी हिस्से को धीमे करके फिर कोशि…
दरवाजे के पास रंगों की थैली: मानसी का अपना रविवार
रविवार की सुबह मानसी ने चित्रकला की कक्षा का समय बताया तो घर में सबने कहा कि उसे जरूर जाना चाहिए। फिर उसी बातचीत में पू…
कार्ड खोया नहीं था: नमन ने कबीर की बात दोबारा सुनी
पिता के कमरे में आते ही कबीर ने कहना शुरू किया कि पुस्तकालय का कार्ड उसके पास नहीं है। नमन ने जूते उतारते हुए बीच में प…
प्रदर्शनी का प्याला और दफ्तर की मेज: अदिति और हर्ष की अपनी राहें
रिश्तेदार ने भोजन के बाद पूछा कि अदिति भी अपने भाई की तरह अच्छी नौकरी कब करेगी। अदिति ने हाथ में पकड़ा प्याला मेज पर रख…
नक्शे पर हल्दी का निशान: रेवती की मेज का अपना स्थान
नक्शे की शीट पर हल्दी का छोटा निशान देखकर सत्रह वर्ष की रेवती रो पड़ी। माँ ने जल्दी में खाने का डिब्बा उसकी मेज पर रख द…
पीतल के डिब्बे का ढीला ढक्कन: दादी की बात के पीछे क्या था
पुराना पीतल का डिब्बा देखते ही श्रुति ने कहा कि इसे अब हटाना चाहिए। ढक्कन ढीला था और नीचे छोटी मरम्मत का निशान दिखाई दे…
कुरियर के डिब्बे से शुरू हुई बात: घर की जिम्मेदारी किसके ध्यान में है
सुबह दरवाजे पर लौटे कुरियर वाले ने पूछा कि कौन सा पैकेट वापस देना है। समर ने कमरे में रखे तीन डिब्बे देखे और पत्नी इशित…
मेज के किनारे छोटी ट्रे: अनन्या ने साथ बैठने का समय चुना
खाने की मेज पर रोटी आने से पहले तीन बार फोन बज चुका था। अनन्या ने पहली बार काम का संदेश देखा, दूसरी बार अपनी बहन का भेज…
आधी पुस्तक का पूरा निर्णय: नील ने अपनी समीक्षा बदली
पुस्तक मंडली की बैठक से पहले नील ने संदेश लिख दिया कि इस महीने का उपन्यास उसे बिल्कुल पसंद नहीं आया। उसे कहानी का मुख्य…
कहानी का खाली आखिरी खाना: वेदांत ने उत्तर रोक लिया
कहानी के आखिरी खाने में आहान ने केवल एक छाता बनाया था। पिता वेदांत ने पूछा कि आगे क्या हुआ। दस वर्ष का आहान कुछ देर सोच…
नई भाषा के सामने पुराना हुनर: हीरा की प्रदर्शनी
प्रदर्शनी की मेज पर रखे कपड़े के बारे में प्रश्न पूछा गया तो हीरा ने बोलना शुरू किया, फिर रुक गई। प्रश्न अंग्रेजी में थ…
रिकॉर्डिंग पूरी, रास्ता अधूरा: आरुष ने समझ की जाँच की
आरुष ने रिकॉर्डिंग रोककर कहा कि निर्देश समझ में आ गए हैं। उसने मुख्य बातें लगभग उन्हीं शब्दों में दोहरा भी दीं। फिर जब…
प्रमाणपत्र के पास अधूरा कुर्ता: तन्वी की अगली सीख
तन्वी ने प्रमाणपत्र की तस्वीर अपनी मेज के पास लगाई थी। लिखित परीक्षा में उसके अच्छे अंक आए थे और परिवार ने मिठाई भी बाँ…
घूमते पंखों के सामने ठहरा प्रश्न: रोहित का विज्ञान मेला
स्टॉल के ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा था कि यह पवनचक्की सबसे अच्छा परिणाम देती है। रोहित ने अपना छोटा नमूना चालू किया और स…
हरे चौखानों से आगे: काव्या के अभ्यास की छोटी योजना
काव्या के कैलेंडर में हर शाम हरे रंग से भरी थी। संगीत कार्यक्रम में अभी तीन सप्ताह थे और उसने रोज एक घंटे अभ्यास लिख रख…
परिणाम की पर्ची के पीछे: वृंदा ने प्रश्न फिर सुना
परिणाम की सूची में वृंदा का नाम नहीं था। उसने मंच से उतरते समय अपनी छोटी पर्ची मोड़कर जेब में रख ली। प्रतियोगिता से पहल…
दो रिपोर्ट की एक पंक्ति: सहायता कहाँ बदल गई
दोनों रिपोर्ट की पहली पंक्ति एक जैसी थी। उसके बाद अगला उदाहरण भी लगभग उन्हीं शब्दों में लिखा था। प्रशिक्षक ने अभिनव और…
एक कैलेंडर में दो दिनचर्याएँ: साथ पढ़ने की नई जगह
समायरा ने तीसरी बार फोन उठाकर समय बदला तो अन्विता ने अपनी नोटबुक बंद कर दी। दोनों ने तय किया था कि रात आठ बजे साथ पढ़ें…
टेढ़े प्याले की शाम: निधि ने अपनी गति कैसे पहचानी
निधि का मिट्टी वाला प्याला तीसरी बार झुक गया। बगल की मेज पर दो तैयार कटोरियाँ रखी थीं और सामने वाला साथी अपने बर्तन का…
सुंदर अक्षरों वाला अधूरा निमंत्रण: मोहित की पहली प्रदर्शनी
मोहित ने आखिरी घुमाव पूरा करके ब्रश मेज पर रखा। प्रदर्शनी का हाथ से लिखा निमंत्रण उसे अब तक का अपना सबसे सुंदर काम लग र…
मोतियों का हार और मन की हार: इला की अभिनय कार्यशाला
इला ने पोशाक के डिब्बे से मोतियों का हार निकाला और पूछा कि इसे किस दृश्य में पहनना है। निर्देशक ने अपनी पटकथा पर उँगली…
तीन गोलों वाला कागज: जब शिक्षक ने अनुभव सुना
शरद ने प्रोजेक्टर बंद किया तो कमरे में एक क्षण की चुप्पी रह गई। उनकी बनाई अभ्यास तालिका सामने वाली स्क्रीन पर बिल्कुल ठ…
नीला पन्ना किसका था: दीप्ति की परीक्षा में अपना उत्तर
उत्तरपुस्तिका जमा करने से पहले दीप्ति ने मेज के नीचे पड़ा नीला पन्ना उठाया। उस पर वही प्रश्न थे जो अभी उसकी परीक्षा में…
पुस्तकालय की खाली मेज: सना की पढ़ने की शुरुआत
पुस्तकालय की खिड़की के पास एक मेज खाली थी। सना दरवाजे से उसे देख रही थी, लेकिन भीतर जाकर बैठ नहीं पा रही थी। उसे लगा कि…
प्रयोग की असफल दोपहर: कागज के पुल ने क्या सिखाया
कागज का पुल पहली छोटी गोटी रखते ही झुक गया। ईशान ने हाथ पीछे खींचे और कहा कि प्रयोग खराब है। उसकी सहेली अद्विका ने दोबा…
रटने से समझने तक: रिया का अधूरा सहयोग
रिया को सहयोग की परिभाषा पूरी याद थी। वह बिना रुके बोल सकती थी कि मिलकर काम करने से उद्देश्य पूरा होता है। परीक्षा में…
गलत उत्तर की उपयोगिता: नमन की तीन कटोरियाँ
कक्षा में प्रश्न था कि तीन डिब्बों में चार चार गेंदें हों तो कुल कितनी गेंदें होंगी। नमन ने तुरंत सात लिख दिया। अध्यापक…
कक्षा का सबसे शांत प्रश्न: पहाड़ की चुप्पी में क्या है
कविता का पाठ समाप्त हुआ तो बच्चों ने अपनी कॉपियाँ खोल लीं। अध्यापिका ने चार प्रश्न लिखवाए और उत्तर समझाए। अंतिम पंक्ति…
सम्मान से दिया गया फीडबैक: अर्णव की पहली रिकॉर्डिंग
अपनी आवाज पहली बार सुनकर अर्णव को हँसी भी आई और संकोच भी। वह सामुदायिक रेडियो के लिए एक छोटी कहानी पढ़ रहा था। रिकॉर्डि…
परिणाम से पहले प्रक्रिया: मान्या की छोटी नोटबुक
स्कोरबोर्ड पर हार लिखी थी और मान्या की नजर उसी पर अटक गई। उसने रैकेट बैग में रखा और मैदान से निकलने लगी। तीन महीने की त…
अधूरे काम की सही सूचना: लगभग पूरा का अधूरा अर्थ
ग्राहक ने पूछा कि अनुवाद तैयार है या नहीं। किरण ने फोन पर कह दिया कि लगभग हो गया है। उसने सचमुच अधिकतर पन्ने अनूदित कर…
उधार लिया हुआ श्रेय: परिचय में अपनी वास्तविक जगह
अपना नया परिचय पृष्ठ बनाते समय युवान ने एक पुराने आयोजन की तस्वीर चुनी। तस्वीर सुंदर थी। मंच पर रोशनी थी, पीछे बड़ा पोस…
बैठक का मौन सदस्य: जो बात नोटबुक में रह गई
बैठक में सब लोग बोल चुके थे। पुस्तकालय के नए पाठक कक्ष का समय तय होना था। कोई सुबह जल्दी खोलना चाहता था, कोई शाम देर तक…
जूनियर की उपयोगी सलाह: अनुभव के साथ नई नजर भी
पंजीकरण की मेज पर भीड़ बढ़ रही थी और मैं बार बार वही निर्देश दोहरा रही थी। नाम पहले लिखिए, फिर शुल्क की पर्ची लीजिए, उस…
काम बाँटने का विवेक: नूपुर की मेज का पहाड़
मोहल्ले की पत्रिका छपने में तीन दिन बचे थे और संपादक नूपुर की मेज पर कागजों का पहाड़ था। कविताओं की जाँच, चित्रों की अन…
घर से काम की सीमाएँ: बंद दरवाजे का सही अर्थ
बैठक शुरू होने से दो मिनट पहले दरवाजे पर सब्जी वाले की आवाज आई। अन्वी ने कैमरा बंद किया, दरवाजा खोला और लौटी तो उसका ना…
वेतन से परे पहचान: तुलना वाली मेज से अपनी राह तक
परिवार के भोजन पर जब वेतन की चर्चा शुरू हुई तो हेमंत ने पानी का गिलास उठा लिया। उसके छोटे चचेरे भाई की नई नौकरी लगी थी।…
ईमेल का कठोर वाक्य: गलती सुधारें, सम्मान भी रखें
ईमेल में केवल सात शब्द थे, फिर भी देवांश उन्हें बार बार पढ़ रहा था। लिखा था कि इतना आसान काम भी ठीक नहीं हुआ। नीचे विभा…
कौशल की शांत मेहनत: आभा के लकड़ी वाले डिब्बे
लकड़ी के छोटे डिब्बे पर अंतिम परत चढ़ाने से पहले आभा ने उसे खिड़की के पास रखा। देखने वाले को वह लगभग तैयार लगता था। लेक…
गलती स्वीकारने वाला प्रबंधक: जिम्मेदारी का सही नाम
ग्राहक के सामने खड़े होकर मैंने कहा कि हमारी टीम से तारीख समझने में गलती हुई है। वाक्य बोलते समय मुझे मालूम था कि गलती…
काम सीखने की उम्र: मनोज की पहली सीधी सिलाई
सिलाई मशीन के पास बैठे बयालीस वर्षीय मनोज ने धागा चौथी बार गलत तरफ से निकाला। उसके सामने बैठी प्रशिक्षिका उसकी बेटी की…
छोटी दुकान का बड़ा भरोसा: वादे से आगे की ईमानदारी
बरसात की उस शाम दुकान बंद करने में दस मिनट बचे थे। नील की छोटी स्टेशनरी की दुकान के बाहर एक महिला छाता मोड़ रही थी। उसे…
कार्यालय की नई सहकर्मी: अनुमान से आगे बढ़कर स्वागत
नई सहकर्मी के आने से पहले ही कार्यालय में उसके बारे में कई बातें तय कर ली गई थीं। किसी ने सुना था कि वह बड़ी कंपनी में…
छुट्टी माँगने की झिझक: अपने समय की बात साफ कहिए
छुट्टी का आवेदन लिखते समय रेवती ने कारण तीन बार बदला। पहले लिखा कि आवश्यक काम है, फिर पारिवारिक कारण लिखा और अंत में पू…
देर तक बैठना ही काम नहीं: मालिनी की रोशन खिड़की
रात के आठ बजे दफ्तर की छठी मंजिल पर केवल तीन खिड़कियाँ रोशन थीं। उनमें से एक के सामने मैं बैठी थी। मेरी रिपोर्ट शाम पाँ…
पहली नौकरी का पहला प्रश्न: समझना भी काम का हिस्सा है
नौकरी के पहले दिन कबीर ने अपनी नई कमीज की आस्तीन तीन बार ठीक की। वह एक छोटे फर्नीचर स्टूडियो में सहायक बना था। सामने नम…
ताली किसके हिस्से: सफलता में पूरी टीम को जगह दीजिए
पुरस्कार की मेज पर रखी चमकीली ढाल देखकर नेहा को अपने हाथों की हल्दी याद आई। सुबह इन्हीं हाथों से उसने दो सौ लोगों के भो…
बैठक में चुराया गया विचार: अपने काम की जगह कैसे रखी
समीक्षा ने बैठक से पहले छोटा नमूना मेज पर रखा था। वह उत्पाद के पैकेट में ऐसा बदलाव सुझा रही थी जिससे ग्राहक उसे खोलने क…
अलग राय, एक साथ: आँगन की चॉक वाली रेखा
आँगन में चॉक से खींची रेखा अगले दिन की बैठक का विषय बन गई। बच्चे वहाँ खेलना चाहते थे। कुछ निवासी उसी जगह शाम को कुर्सिय…
रिश्ता और निजता: छोटी डायरी के अधूरे पन्ने
वरुण को किताब खोजते समय आरुषि की छोटी डायरी मिली। वह मेज पर खुली रह गई थी। उसकी नजर एक वाक्य पर ठहरी जिसमें लिखा था कि…
अपनी पसंद की पहचान: संग्रहालय की धीमी दोपहर
छुट्टी की यात्रा की योजना बनाते समय आरोही ने हर प्रस्ताव पर हाँ कहा। समुद्र किनारे जाना है, ठीक है। नया कैफे देखना है,…
रूठने से पहले एक प्रश्न: मिलने का दूसरा तरीका
प्रतीक ने तीसरी बार मिलने का कार्यक्रम टाल दिया तो आदित्य ने तय किया कि अब वह भी फोन नहीं करेगा। कभी दोनों सप्ताह में द…
सम्मान की भाषा: सुधार बताइए, व्यक्ति को छोटा नहीं
नाटक के अभ्यास में रैना तीसरी बार वही संवाद बोल रही थी। निर्देशक ध्रुव ने माथा पकड़कर कहा कि इतनी सी बात भी समझ नहीं आत…
पुराने मित्र का नया जीवन: दोस्ती का समय बदल सकता है
हमारी मित्र मंडली में ऋषि सबसे पहले पहुँचने वाला व्यक्ति था। चाय की दुकान हो या देर रात की बातचीत, उसे बुलाने से पहले ह…
दूरी में भी भरोसा: खाली कुर्सी का गलत अर्थ
वीडियो कॉल पर खाली कुर्सी दिखाई दे रही थी। वाणी कुछ क्षण पहले उठकर बाहर गई थी और नमन स्क्रीन के सामने बैठा इंतजार कर रह…
अनकही उम्मीद का बोझ: जो चाहिए, वह कह भी दीजिए
साक्षात्कार से लौटते समय मैं चाहता था कि सोनल का फोन आए। मैंने सुबह उसे केवल इतना बताया था कि आज एक महत्वपूर्ण काम है।…
मित्र की सफलता का उत्सव: अपना पहला पूरा पत्र
रेवती ने लिफाफा मेज पर रखा और कहा कि आज चाय उसकी ओर से है। सीमा ने पूछा कि कोई बड़ा आदेश मिला क्या। रेवती की छोटी दुकान…
शादी की तैयारी और दो इच्छाएँ: अपनी पसंद की सूची कहाँ है
विवाह की तैयारी वाली मेज पर पाँच सूचियाँ थीं। मेहमान, भोजन, सजावट, तस्वीरें और खरीदारी। रिद्धि ने पूछा कि उनकी अपनी पसं…
साझा निर्णय का साहस: घर सबकी इच्छा से बनता है
अभय ने उत्साह से बताया कि उसने घर का छोटा कमरा खाली करने की तैयारी शुरू कर दी है। उसके माता पिता अब शहर आकर उनके साथ रह…
तस्वीर में मुस्कान, घर में मौन: जो बात तस्वीर नहीं कहती
शादी की वर्षगाँठ पर खींची तस्वीर में अन्वी और साहिल बहुत खुश दिखाई दे रहे थे। शाम की हल्की रोशनी थी और दोनों किसी पुरान…
बराबरी की छोटी कुर्सी: सम्मान को जगह भी चाहिए
कार्यशाला की तस्वीर में सब कुछ सुंदर दिखाई दे रहा था। सामने रंगीन कपड़े थे, दीवार पर स्वागत का पोस्टर और बीच में लकड़ी…
किसी का समय अपना न मानें: बस पाँच मिनट का काम
रात को ग्यारह बजे रोहित के फोन पर संदेश आया कि सुबह तक एक छोटा पोस्टर बना देना। संदेश चचेरे भाई का था। परिवार के समारोह…
तुलना से थकी दोस्ती: तुम्हारी खुशी मेरी कमी नहीं
कॉलेज के दस वर्ष पूरे होने पर अमृता और सुरभि फिर मिलीं। स्टेशन के बाहर वही पुरानी चाय की दुकान थी, लेकिन दोनों के पास ब…
माफी के बाद का व्यवहार: फूलों से आगे का साथ
रिया दरवाजे के पास तैयार बैठी थी। उसे अपनी पहली कहानी पाठ में पहुँचना था और विवान ने साथ चलने का वादा किया था। समय निकल…
प्रेम में अपनी जगह: एक कमरे की दो खिड़कियाँ
हमारी शादी के बाद पहले रविवार को नील ने पूछा था कि हम दिनभर क्या करेंगे। मुझे यह प्रश्न अच्छा लगा। साथ समय बिताने की नई…
पहली मुलाकात का अधूरा अनुमान: चुप्पी में भी कोई बात होती है
पुस्तक चर्चा की पहली बैठक में अदिति सबसे पीछे की कुर्सी पर बैठी थी। परिचय का क्रम आया तो उसने अपना नाम बताया और कहा कि…
ना कहने पर भी अपनापन: मेघा की हरी साड़ी
मेघा ने अलमारी से हरी साड़ी निकाली तो उसकी मित्र पायल ने तुरंत कहा कि वही उसे अगले दिन के कार्यक्रम में पहननी है। साड़ी…
उत्तर देने से पहले सुनना: दिशा की बात अधूरी रह गई थी
दिशा ने उस शाम केवल इतना कहा था कि आज का दिन बहुत कठिन रहा। मैंने तुरंत पूछा कि किसने क्या कहा। फिर उसके उत्तर पूरा करन…
गलती सुधारने वाला संदेश: मेहनत को उसका सही नाम दीजिए
शाम के संगीत कार्यक्रम की तस्वीर राघव ने जल्दी में साझा कर दी। मंच पर तीन कलाकार थे और बीच में बैठी गायिका अनुष्का को व…
डिजिटल यादों की सफाई: दादी की आवाज कहाँ रखी है
अंशुमान के फोन में जगह कम होने का संदेश कई दिनों से आ रहा था। वह हर बार उसे बंद कर देता। यात्रा की तस्वीरें, पुराने बिल…
साझा फोन की मर्यादा: साथ रहते हुए अपनी जगह
घर में शाम के समय एक ही फोन के कई काम थे। पिता को अपने परिचित से बात करनी होती, इशिका को नौकरी के आवेदन देखने होते और ब…
ऑनलाइन कक्षा में प्रश्न: समझ न आए तो पूछिए
ऑनलाइन कक्षा में शिक्षिका ने पूछा कि क्या सबको समझ में आ गया। स्क्रीन पर कई छोटे चेहरे चुप थे। समीरा ने उत्तर देने के ल…
फिल्टर के पीछे का चेहरा: तस्वीर में अपनी हँसी रहने दीजिए
नैना ने अपनी नई तस्वीर देखी और कुछ क्षण पहचानने की कोशिश की। चेहरा चमकदार था, आँखें थोड़ी बड़ी और त्वचा पर कोई असमानता…
पुरानी पोस्ट की नई सीख: राय बदलने का साहस
वर्षों पुरानी तस्वीर अचानक समूह में ऊपर आई। उसमें महक कॉलेज के मंच पर कविता पढ़ रही थी। कपड़े साधारण थे, बाल जल्दी में…
कृत्रिम बुद्धि और अपनी समझ: सुंदर उत्तर का सच कैसे जाँचें
तन्वी ने अपने कस्बे के पुराने पुस्तकालय पर लेख लिखने का काम लिया था। उसके पास कुछ तस्वीरें थीं, दो बुजुर्ग पाठकों की बा…
नक्शे से आगे का रास्ता: नीली रेखा के बाहर की समझ
कस्बे के बाहर सड़क दो हिस्सों में बँटती थी। अर्जुन ने फोन पर नीली रेखा देखी और गाड़ी दाईं ओर मोड़ने लगा। सामने बैठे उसक…
बुजुर्ग का पहला वीडियो कॉल: सीखने में जल्दी किस बात की
दीनानाथ ने फोन को कान से हटाकर सामने किया तो स्क्रीन पर केवल छत का पंखा दिखाई दिया। दूसरी ओर उनकी पोती हँस रही थी। उन्ह…
स्क्रीन से बाहर का रविवार: छत पर उगा एक साझा काम
रविवार की सुबह अनिरुद्ध ने परिवार से घोषणा की कि आज कोई फोन नहीं छुएगा। उसे लग रहा था कि घर में सब अपनी अपनी स्क्रीन मे…
बच्चे की तस्वीर किसकी जिम्मेदारी: तृषा की बात भी सुनिए
विद्यालय के वार्षिक कार्यक्रम में नौ वर्ष की तृषा ने पहली बार मंच पर कविता सुनाई। उसकी माँ अवनि दर्शकों में बैठी थी। कव…
एक तस्वीर के लिए ठहरना: दुनिया को बिना फ्रेम के देखिए
रीमा ने नदी किनारे पहुँचते ही कैमरा निकाल लिया। सुबह की धूप पानी पर टूट रही थी और पुराने घाट की सीढ़ियाँ हल्की सुनहरी द…
लाइक से बाहर की दोस्ती: एक छोटे लिफाफे का साथ
उदय ने पुराने मित्रों के समूह में अपनी दुकान की नई तस्वीर डाली। शटर पर ताजा रंग था और भीतर लकड़ी की अलमारियाँ चमक रही थ…
रात का अंतिम नोटिफिकेशन: आज इतना काफी है
रात के दस बजकर चालीस मिनट हुए थे। काव्या ने रसोई की बत्ती बंद की और मेज पर रखी किताब उठाई। उसी समय फोन चमका। कार्यालय क…
पासवर्ड की छोटी भूल: भरोसे के साथ सीमाएँ भी जरूरी
समर ने सामुदायिक केंद्र की मेज पर अपना लैपटॉप खोला और कार्यक्रम के प्रमाणपत्र छापने लगा। रविवार की चित्रकला कार्यशाला स…
नकली आवाज और असली पहचान: मौसी ने फोन वापस क्यों मिलाया
दोपहर में सिलाई की मेज पर कपड़ा फैलाए हुए सुधा ने फोन उठाया। दूसरी ओर घबराई हुई आवाज थी। उसने मौसी कहकर पुकारा तो सुधा…
ऑनलाइन प्रशंसा का इंतजार: नीली कटोरी ने क्या सिखाया
अनन्या ने अपनी बनाई नीली कटोरी की तस्वीर तीसरी बार बदली। पहले खिड़की के पास रखी, फिर सफेद कपड़े पर और आखिर में हाथ में…
बिना पढ़े भेजा गया संदेश: अच्छी नीयत के साथ थोड़ी जिम्मेदारी
कार्यालय की बैठक शुरू होने में दस मिनट बचे थे। सना ने फोन खोला तो पड़ोस के पुस्तकालय का एक संदेश दिखाई दिया। रविवार को…
परिवार के समूह में अधूरी खबर: भेजने से पहले दो मिनट
सुबह की चाय अभी मेज पर रखी ही गई थी कि परिवार के समूह में एक संदेश आया। शहर का पुराना पुल आज शाम से बंद होने वाला था। स…
एक फोटो भेजने से पहले: सुंदर तस्वीर के साथ भरोसा भी बचाएँ
इरा ने कैमरे की स्क्रीन नमन की ओर घुमाई। कला प्रदर्शनी के बरामदे में खींची गई तस्वीर सचमुच सुंदर थी। पीछे हल्की रोशनी थ…
खिड़की के बाहर का पेड़: स्मृति और आज की जरूरत के बीच बातचीत
मकानों के बीच पुराने आँगन में एक बड़ा पेड़ था। बचपन में अनामिका उसके नीचे बैठती थी। वर्षों बाद घर लौटी तो पड़ोस की बैठक…
पुराने कपड़ों की नई शाम: मरम्मत की मेज पर लौटी हुई स्मृतियाँ
त्योहार से पहले ऋचा ने अलमारी खोली तो पुराना नीला दुपट्टा हाथ में आया। किनारे का छोटा हिस्सा उधड़ा था। उसे फेंकने का मन…
बिना नाम के बीज: दादी की संदूकची में मिला एक अधूरा परिचय
दादी की संदूकची में पुराने कपड़ों के नीचे कागज के छोटे लिफाफे मिले। अनिका ने एक उठाया तो भीतर कुछ बीज खनके। दो लिफाफों…
भीगी हुई सूचना, बची हुई स्मृतियाँ: मोहल्ले ने अपने अतीत को कैसे सुना
वाचनालय की पुरानी अलमारी के पास बारिश का पानी आ गया था। तत्काल जिम्मेदार लोगों की सहायता से जगह संभाली गई। बाद में सामा…
यात्रा पर जाती आरती के पौधे: सहायता माँगने में कितनी स्पष्टता चाहिए
आरती को कुछ सप्ताह के लिए अपने परिवार के पास जाना था। सामान तैयार था, लेकिन बालकनी के पौधों को देखकर वह बार-बार रुक जात…
दीवार के उस पार भी जीवन है: पड़ोसी और संगीत की छात्रा की कहानी
संध्या संगीत सीख रही थी। दिन में काम और यात्रा के बाद रात का समय ही उसे अभ्यास के लिए मिलता। वह कमरे में बैठकर गाती तो…
तस्वीर मेरी भी है: परिवार के एक फोटो ने किसकी अनुमति पूछी
परिवार के मिलन की तस्वीर बहुत सुंदर आई थी। सब हँस रहे थे और पीछे पुराने घर की खिड़की थी। अदिति ने तुरंत फोन उठाया कि इस…
नल की बारी किसकी थी? एक आँगन ने अपनी चुप्पी कैसे बदली
साझे आँगन के नल के पास सुबह से बाल्टियाँ रखी थीं। पानी आने का समय सीमित था और हर घर की दिनचर्या अलग। सविता सबसे पहले बा…
उत्सव के बाद कौन लौटेगा? खाली कटोरों ने दिखाई पूरी जिम्मेदारी
मोहल्ले का मिलन समारोह सफल रहा था। आखिरी गीत के बाद लोगों ने आयोजकों को धन्यवाद दिया और अपने घर चले गए। आँगन में रंगीन…
यह बेंच किसकी है? छाया में बैठने की एक छोटी जगह की बड़ी कहानी
पार्क के कोने में पेड़ की छाया वाली एक बेंच थी। सुबह कुछ बुजुर्ग वहाँ बैठते, दोपहर में कभी कोई काम से लौटता व्यक्ति रुक…
अधूरी किनारी का सवाल: पुरानी बुनकर ने अपनी शिष्या से क्या सीखा
पुराने समय के एक कल्पित कस्बे में बुनकर पद्मा के यहाँ नई शिष्या कुमुद आई थी। उसे तैयार कपड़ों से अधिक अधूरे नमूने आकर्ष…
जिस सीढ़ी पर नाम नहीं था: दिखाई न देने वाली कारीगरी का अर्थ
पुराने समय के एक कल्पित नगर में शिल्पशाला थी। वहाँ नई कारीगर अमृता को एक साधारण पत्थर की सीढ़ी का काम मिला। दूसरे साथी…
बड़ा बिल नहीं, सही जवाब: नाजिया की छोटी मरम्मत वाली दुकान
नाजिया की छोटी दुकान में पुरानी घड़ियाँ आती थीं। किसी की मेज वाली घड़ी बंद होती, किसी की दीवार वाली पीछे रह जाती। वह हर…
एक भट्ठी और दो कुम्हार: साझा साधन के साथ सम्मान कैसे बचा
गाँव के किनारे सुलेखा और बिंदु की मिट्टी के बर्तनों की छोटी कार्यशालाएँ थीं। आकार और रंग की उनकी पसंद अलग थी, लेकिन एक…
खिड़की के पास बचा आकाश: अन्वी ने हर खाली जगह भरना क्यों छोड़ दिया
अन्वी अपने पहले छोटे प्रदर्शन के लिए चित्र बना रही थी। कैनवास पर आँगन की खिड़की थी, बाहर हल्का आकाश और भीतर मेज पर एक फ…
नक्शे में सीढ़ियाँ कहाँ थीं? पैदल चली निरीक्षा ने अपनी रचना फिर देखी
निरीक्षा ने मोहल्ले के छोटे सांस्कृतिक भवन का सुंदर नक्शा बनाया था। प्रवेश, पुस्तक कक्ष और सभागार अलग रंगों में थे। उसे…
चिट्ठी नहीं पहुँची, सच पहुँचा: लीला के लौटाए हुए लिफाफे की कहानी
लीला गाँवों में एक छोटी निजी वितरण सेवा का काम करती थी। कागज, निमंत्रण और सामान पहुँचाने की सूची सुबह मिलती और शाम को उ…
घर अपने आप नहीं चलता: कैलेंडर पर दिखाई दिए मीना के अनकहे काम
रविवार की सुबह मीना घर पर नहीं थीं। वे अपनी पुरानी सहेलियों के साथ पुस्तक मेले गई थीं। पति अरुण ने कहा था कि घर की चिंत…
किनारे लौटती नाव: सबकी जल्दी के बीच नंदा का शांत निर्णय
कल्पित पुराने समय के एक नदी किनारे नंदा यात्रियों को पार पहुँचाने का काम करती थी। लोग उसके समय और स्पष्ट बात पर भरोसा क…
तालियाँ किसके हिस्से आईं? मंच के पीछे रह गई अर्चना की कहानी
नाटक समाप्त हुआ तो सभागार में खूब तालियाँ बजीं। कलाकार सामने आए और दर्शकों की ओर झुके। पीछे अर्चना मंच की रोशनी की सूची…
शब्द सब आ गए, कहानी कहाँ गई? अनुवाद की मेज पर दो सहेलियाँ
मधुरा और सृष्टि को कक्षा की छोटी संस्कृत कहानी का सरल हिंदी रूप तैयार करना था। उद्देश्य छोटे बच्चों को वही कथा समझाना थ…
पाठक, प्रश्नकर्ता और सुनने वाला: छोटी पाठसभा में सबकी बारी कैसे आई
रविवार की पाठसभा में आठ लोग आते थे, लेकिन आवाजें दो ही सुनाई देती थीं। मोहित तेजी से पाठ पढ़ता और देविका तुरंत अर्थ बता…
दस मिनट की साझा पढ़ाई: पिता और बेटी ने एक-दूसरे को कैसे सुना
रात के खाने के बाद नयन अपनी बेटी इशिता से पूछते कि आज क्या पढ़ा। उत्तर अक्सर एक जैसा मिलता, “सब ठीक है।” वे किताब देखते…
अपनी आवाज फिर सुनना: रिकॉर्डिंग अभ्यास में सम्मान और सुधार की कहानी
चारु जब संस्कृत का छोटा परिचय बोलती, तो उसे लगता कि हर शब्द जल्दी खत्म कर रही है। शिक्षक कहते कि कुछ जगह रुक सकती हो, ल…
सब्जी की दुकान पर पहला शब्द: भाषा को रोजमर्रा से जोड़ने की कहानी
समीरा संस्कृत सीख रही थी, लेकिन उसकी कॉपी और बाहर की दुनिया अलग-अलग चलती थीं। कक्षा में वह वस्तुओं के नाम लिखती और घर आ…
पूर्ण वाक्य के इंतजार में रुकी बातचीत: रेवती ने पहला प्रश्न कैसे पूछा
रेवती संस्कृत की शुरुआती कक्षा में सबसे साफ गृहकार्य लाती थी। उसके लिखे उत्तरों में शिक्षक के बताए सुधार भी होते थे। फि…
पहले सुनना भी पढ़ाई है: अनन्या की बंद किताब वाला अभ्यास
अनन्या ने संस्कृत की कक्षा में नई पुस्तक सबसे पहले खरीदी थी। हर पृष्ठ पर रंगीन निशान थे और पीछे शब्दों की सूची लगी थी।…
गलती वाली कॉपी छिपाना क्यों छोड़ दिया? तारा के प्रश्नों की छोटी यात्रा
तारा की दो कॉपियाँ थीं। एक साफ, जिसमें वह संस्कृत के अभ्यास सुंदर अक्षरों में दोबारा लिखती थी। दूसरी पुरानी, जिसके पन्न…
दादी की नई पुस्तक: सीखने की मेज पर उम्र की जगह जिज्ञासा बैठी
घर के आँगन में दादी की कुर्सी हमेशा एक ही जगह रहती थी। सुबह अखबार, दोपहर थोड़ी बातचीत और शाम को पौधों की देखभाल। एक रवि…
शब्दकोश खुला था, फिर भी अर्थ क्यों उलझा? वाक्य में लौटने की कहानी
ईरा को नया शब्द मिलते ही शब्दकोश खोलने की आदत थी। वह पहला अर्थ कॉपी में लिखती और आगे बढ़ जाती। एक छोटे संस्कृत पाठ का अ…
पीला फीता और विजेता टोली: साथ दिखाई देना ही कारण होना नहीं
कबड्डी के मैदान से लौटते हुए आर्या ने अपने बालों का पीला फीता खोलकर जेब में रख लिया। उनकी टोली लगातार दूसरा मैच जीती थी…
दो निमंत्रण और एक शाम: मुफ्त मिलने पर भी हर चुनाव की कीमत होती है
दिया के सामने दो निमंत्रण रखे थे। शहर में उसकी प्रिय गायिका का छोटा कार्यक्रम था। उसी शाम मोहल्ले का नया पाठक समूह पहली…
दीवार बनाने से पहले कागज की दीवार: निर्णय को परखने की छोटी बुद्धि
सामुदायिक भवन का बड़ा कमरा दो भागों में बाँटने का प्रस्ताव आया। एक तरफ बच्चों का अध्ययन, दूसरी तरफ सिलाई समूह का काम हो…
दो लाल पर्चियाँ निकल गईं: क्या अब नीली निकलना तय है?
कक्षा की मेज पर एक कटोरा रखा था। उसमें समान आकार की दस मोड़ी हुई पर्चियाँ थीं। आठ के भीतर नीला और दो के भीतर लाल रंग था…
पंजीकरण की पर्ची: अवसर मिलने और चयन हो जाने में अंतर
नाटक की कार्यशाला के बाहर लंबी मेज लगी थी। विराज ने अपना नाम लिखा, पर्ची ली और घर की ओर दौड़ गया। दरवाजे पर पहुँचते ही…
शांत पुस्तकालय में बोलती मशीन: समान नियम का उद्देश्य किसे भूल गया?
पुस्तकालय में दीवार पर साफ लिखा था, “कृपया अनावश्यक आवाज न करें।” यामिनी ने यह पंक्ति पढ़ी और अपनी छोटी संचार मशीन मेज…
तीन दिन का बनाया पोस्टर बदलना पड़े तो क्या मेहनत व्यर्थ हो गई?
काव्या ने पोस्टर मेज पर फैलाया तो कमरे में सबने उसकी प्रशंसा की। रंग सुंदर थे और अक्षर दूर से पढ़े जा रहे थे। तीन दिन स…
जो लोग आए ही नहीं, उनकी राय कहाँ है? एक छोटे सर्वे की बड़ी कमी
दोपहर के तीन बजे वाचनालय लगभग खाली था। प्रबंधक ईशा ने सोचा कि शायद लोगों की पढ़ने में रुचि कम हो गई है। समिति ने उनसे छ…
तेज़ परोसने की खिड़की और लंबी होती कतार: सुधार आखिर किस चीज का हुआ?
विद्यालय की भोजनशाला में छुट्टी का समय बदलते ही भीड़ बढ़ गई। प्रभारी रचना ने देखा कि भोजन परोसने की खिड़की पर बच्चे देर…
औसत नाप के जूते: समूह का एक अंक हर बच्चे की जरूरत कैसे बन गया?
विद्यालय के छोटे नाटक के लिए बच्चों को समान रंग के जूते देने थे। स्वयंसेवक अमित ने आठ बच्चों के नाप की सूची ली। जल्दी म…
राइट बंधुओं की उड़ान: जब परिणाम न मिले तो मेहनत के साथ मान्यता भी जाँचें
कागज का छोटा ग्लाइडर बार-बार नीचे गिर रहा था। राघव हर बार उसे अधिक जोर से छोड़ता। उसकी मित्र निष्ठा ने कहा कि शायद समस्…
ट्रिएस्ट की गहराई: साहस का अर्थ जोखिम को समझे बिना आगे बढ़ना नहीं
संग्रहालय में रखे छोटे मॉडल को देखकर सुहानी ने पूछा कि समुद्र के इतने नीचे कोई कैसे जा सकता है। वह अंतरिक्ष यात्राओं के…
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन: असाधारण जगह पर भी साथ रहने के साधारण नियम
अंतरिक्ष स्टेशन की तस्वीर में पृथ्वी का दृश्य सबसे पहले ध्यान खींचता है। खिड़की के बाहर बादल और नीचे नीला संसार दिखाई द…
चेचक उन्मूलन की सीख: आखिरी व्यक्ति तक पहुँचना केवल आँकड़ा पूरा करना नहीं
किसी वैश्विक उपलब्धि की घोषणा एक दिन होती है, लेकिन उसके पीछे अनेक स्थानों पर किया गया नियमित काम हो सकता है। चेचक उन्म…
न्यूज़ीलैंड का महिला मताधिकार: बड़े बदलाव में छोटे हस्ताक्षरों का क्या अर्थ था?
एक लंबा कागजी दस्तावेज सामने हो और उसमें हजारों नाम लिखे हों, तो पहली दृष्टि में वह केवल सूची लग सकता है। लेकिन प्रत्ये…
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: साझा समस्या के सामने अच्छे इरादों से आगे कैसे बढ़ें?
कोई समस्या सबको प्रभावित करे, तब भी उसका समाधान अपने आप साझा नहीं हो जाता। हर पक्ष दूसरे से पहले कदम की अपेक्षा कर सकता…
मेरी क्यूरी की स्मृति: पुरस्कार की तस्वीर से पहले कौन-सा प्रश्न था?
विज्ञान दिवस के पोस्टर पर मेरी क्यूरी की तस्वीर लगाते हुए आहना ने नीचे दो नोबेल पुरस्कारों की जानकारी लिख दी। उसे लगा क…
अपोलो-11 के माइकल कॉलिन्स: जो चाँद पर नहीं उतरा, उसकी भूमिका क्या थी?
चंद्रमा पर मनुष्य के कदम की तस्वीर देखते ही दो नाम तुरंत याद आते हैं। लेकिन अपोलो-11 में तीन अंतरिक्ष यात्री थे। तीसरे…
शांतिनिकेतन की प्रेरणा: कक्षा बदलने से पहले सीखने की दृष्टि कैसे बदले?
नीलिमा बच्चों को विद्यालय के आँगन में ले आईं। सब प्रसन्न थे कि आज कमरे में नहीं बैठना पड़ेगा। लेकिन पाँच मिनट बाद वही प…
साँची का स्तूप: एक स्मारक के पीछे कितनी पीढ़ियों के हाथ होते हैं?
अन्विता ने साँची के स्तूप की तस्वीर पहले कई बार देखी थी। यात्रा में उसे लगा कि अब वह उसी तस्वीर को सामने देखने जा रही ह…
रानी की वाव: उपयोगी चीज सुंदर भी हो सकती है, यह किसने भुला दिया?
पुस्तकालय का नया नक्शा बन रहा था। मानवी ने खिड़की के पास पढ़ने की जगह और प्रवेश पर एक छोटा कलात्मक नामपट्ट सुझाया। बैठक…
जंतर मंतर का प्रश्न: अनुमान लगाने और मापने में कितना अंतर है?
सभी बच्चों को लगा कि दस मिनट बीत गए हैं। अध्यापिका ने घड़ी दिखाई तो केवल छह मिनट हुए थे। कुछ बच्चों को यह बहुत लंबा समय…
दार्जिलिंग की पहाड़ी रेल: रास्ता मुड़ता है तो क्या यात्रा कमजोर हो जाती है?
खिड़की से बाहर पटरी का मोड़ दिखा तो तन्वी ने पूछा कि रेल सीधी क्यों नहीं जा रही। मानचित्र पर दो स्थानों को जोड़ना उसे ब…
हम भारत के लोग: प्रस्तावना के शब्द हमारे व्यवहार तक कैसे पहुँचें?
सना ने विद्यालय के प्रवेश पर संविधान की प्रस्तावना कई बार पढ़ी थी। समारोह में वह उसे स्पष्ट आवाज में बोल भी सकती थी। ले…
चंद्रयान-3: जिस क्षण पर ताली बजती है, उसके पीछे कितना काम छिपा होता है?
स्क्रीन पर संकेत बदल रहे थे और कमरे में सबकी आँखें एक जगह थीं। अवनि ने पहली बार किसी अंतरिक्ष अभियान का सीधा प्रसारण इत…
भीमबेटका की चित्रभाषा: जिनकी लिखित डायरी नहीं, उनका जीवन कैसे पढ़ें?
कक्षा में अध्यापिका ने कहा कि आज किसी को शब्दों में कुछ नहीं लिखना है। हर बच्चा अपने दिन की एक घटना केवल चित्र में दिखा…
विभीषण की शरणागति: संदेह सुनकर भी करुणा के लिए स्थान कैसे बने?
समुद्र के किनारे युद्ध की तैयारी है। उसी समय रावण के भाई विभीषण राम की ओर आते हैं। उनकी पहचान ही प्रश्न खड़ा करती है। व…
वाल्मीकि का पहला प्रश्न: हम अपने जीवन का नायक किस आधार पर चुनते हैं?
किसी कथा का आरंभ उसकी दिशा बता सकता है। वाल्मीकि रामायण के आरंभ में पहले युद्ध का दृश्य नहीं आता, न किसी राजसिंहासन का…
सीता और राम की मुद्रिका: आश्वासन को विश्वास बनने के लिए क्या चाहिए?
अशोक वाटिका में सीता के सामने हनुमान हैं। वे राम के दूत होने की बात रखते हैं। परिस्थिति ऐसी है कि केवल अच्छा समाचार सुन…
शबरी का स्वागत: प्रतीक्षा को निष्क्रिय रहने के बजाय सेवा में कैसे बदलें?
राम और लक्ष्मण पम्पा के निकट शबरी के आश्रम पहुँचते हैं। यहाँ राजमहल का वैभव नहीं, साधना और आतिथ्य की अपनी गरिमा है। शबर…
नल का सेतु: बड़े संकल्प को कुशलता और सहयोग की जमीन क्यों चाहिए?
समुद्र सामने है और उस पार पहुँचना है। सेना का उत्साह अपने स्थान पर है, लेकिन उत्साह स्वयं रास्ता नहीं बन जाता। अब संकल्…
जटायु का सम्मान: सहायता का मूल्य केवल सफलता से क्यों न आँकें?
सीता की खोज में आगे बढ़ते राम और लक्ष्मण के सामने जटायु का अंतिम समय आता है। जटायु सीता को बचाने का प्रयास कर चुके हैं,…
हनुमान की पहली बातचीत: प्रभावशाली बोलना केवल ऊँची आवाज नहीं
ऋष्यमूक के आसपास दो अपरिचित यात्री दिखाई देते हैं। उनके वस्त्र तपस्वियों जैसे हैं, लेकिन व्यक्तित्व और साथ रखे शस्त्र अ…
अंगद का दूतत्व: शक्ति होते हुए भी संवाद का अवसर क्यों दिया जाए?
लंका के सामने सेना पहुँच चुकी है। टकराव की संभावना अब दूर की बात नहीं रही। इसी समय राम अंगद को रावण के पास दूत बनाकर भे…
वेब का जन्म: कभी बड़ी क्रांति जानकारी को जोड़ने से शुरू होती है
एक छोटे पुस्तकालय में जानकारी की कमी नहीं थी। पुस्तकों की सूची एक कॉपी में, सदस्यों का विवरण दूसरे रजिस्टर में और कार्य…
पेनिसिलिन की कहानी: खोज की चमक के पीछे विकास का लंबा काम
किसी खोज की लोकप्रिय कहानी अक्सर एक क्षण पर टिक जाती है। कोई असामान्य चीज दिखाई दी, किसी ने प्रश्न पूछा और संसार बदल गय…
नालंदा की ईंटें: ज्ञान को टिकाए रखने के लिए भवन से अधिक क्या चाहिए?
नालंदा के अवशेष देखते हुए अदिति ने शुरुआत में केवल ईंटों की दीवारें देखीं। उसे लगा कि अब वहाँ बचा ही क्या है। फिर मार्ग…
हनुमान की खोज: अभी नहीं मिला, इसलिए वह है ही नहीं—क्या यह सही निष्कर्ष है?
लंका में बहुत खोजने के बाद भी सीता दिखाई नहीं दीं। हनुमान के सामने अब केवल भौतिक कठिनाई नहीं थी। मन के भीतर अनेक आशंकाए…
धोलावीरा के जलाशय: आवश्यकता आने से पहले तैयारी की बुद्धि
गर्मी की पहली सुबह मोहल्ले की टंकी देर से भरी। लोग बाल्टियाँ लेकर नीचे आए और शिकायतें शुरू हो गईं। कुछ दिनों तक असुविधा…
भरत और पादुकाएँ: अधिकार सामने हो, तब मर्यादा कैसे पहचानी जाए?
चित्रकूट की ओर आए भरत के सामने केवल बड़े भाई से मिलने का अवसर नहीं था। अयोध्या की व्यवस्था और राजसिंहासन का प्रश्न भी ख…
याज्ञवल्क्य और जनक का संवाद: बाहर की रोशनी से भीतर की जिज्ञासा तक
शाम का समय सोचिए। दिन भर दिखाई देने वाली वस्तुएँ अँधेरे में धीरे-धीरे ओझल होने लगती हैं। हम दीपक जलाते हैं और रास्ता फि…
गलत उत्तर वाला पन्ना: मदद और नकल के बीच की पतली रेखा
अगले दिन गणित की छोटी परीक्षा थी। ईशा को भिन्नों वाले प्रश्न समझ में आ गए थे, लेकिन उसका मित्र राघव कई दिन विद्यालय न आ…
मैदान में बची आधी बोतल: साझा संसाधन की जिम्मेदारी किसकी थी?
गर्मी की शुरुआत थी। विद्यालय में खेल का अंतिम अभ्यास चल रहा था। छोटी दौड़ पूरी करके कबीर ने अपनी बोतल का ढक्कन खोला और…
उधम सिंह: एक जैसे सुनाई देने वाले दो नाम इतिहास का अर्थ बदल देते हैं
मान लीजिए किसी बच्चे से पूछा जाए कि उधम सिंह ने किस ब्रिटिश अधिकारी की हत्या की थी। वह तुरंत जनरल डायर का नाम बोल दे। उ…
मिट्टी के नीचे छिपा बीज: जो दिखाई नहीं देता, वह व्यर्थ नहीं होता
विद्यालय के प्रकृति-सप्ताह में हर बच्चे को एक छोटा गमला दिया गया। इमरान ने अपने गमले पर लाल रंग से नाम लिखा और उसमें बी…
बारिश में काँपता पिल्ला: करुणा केवल प्यार जताने का नाम नहीं
बरसात की शाम थी। दस वर्ष की जोया विद्यालय से लौटते समय दुकान के छज्जे के नीचे रुकी। वहाँ एक छोटा पिल्ला काँपता हुआ बैठा…
प्रीतिलता वाड्देदार: पढ़ने वाली युवती अपने समय का प्रश्न भी पूछ सकती है
किसी छात्रा की उपलब्धि सुनते समय हम प्रायः उसके अंकों, पुरस्कारों और आगे की पढ़ाई के विषय में पूछते हैं। यह स्वाभाविक ह…
वह तस्वीर मजेदार थी, लेकिन उसे साझा करने का अधिकार किसका था?
कक्षा की नाट्य-प्रस्तुति के अभ्यास में नमन का मुकुट बार-बार टेढ़ा हो रहा था। वह राजा की गंभीर आवाज निकालने की कोशिश करत…
पेंसिल पर लिखा नाम: ईमानदारी की वह परीक्षा जिसमें कोई अध्यापक नहीं था
विद्यालय की छुट्टी हो चुकी थी। सात वर्ष का नील अपनी पानी की बोतल लेने कक्षा में लौटा तो खिड़की के पास एक नीली पेंसिल पड…
पाणिनि से सीखें: भाषा के पीछे छिपी व्यवस्था देखने का आनंद
मीरा ने संस्कृत की कॉपी में लिखा, बालिका पुस्तकं पठति। उसके मित्र ने वही बात अलग क्रम में रख दी, पुस्तकं बालिका पठति। द…
एक संदेश और खाली कक्षा: सुनी हुई बात आगे बढ़ाने से पहले
रविवार की शाम आर्या के परिवार वाले संदेश-समूह में एक तस्वीर आई। तस्वीर पर विद्यालय का नाम लिखा था और नीचे बड़े अक्षरों…
मैत्रेयी का प्रश्न: किसी वस्तु का मूल्य जानने से पहले उसकी सीमा पहचानिए
एक ऐसी बातचीत की कल्पना कीजिए जिसमें सामने संपत्ति का प्रश्न हो, लेकिन सुनने वाला व्यक्ति उससे भी अधिक मूल प्रश्न पूछ द…
महावीर की अहिंसा: हमारी छोटी सुविधा का बोझ किस जीव पर पड़ता है?
बरसात के बाद सामुदायिक भवन का आँगन साफ किया जा रहा था। अगले दिन वहाँ बच्चों का कार्यक्रम था। अनन्या ने देखा कि एक कोने…
बस की आखिरी सीट: बराबरी का अर्थ सबको एक जैसा मान लेना नहीं
विद्यालय की शैक्षिक यात्रा पर जाने वाली बस आते ही बच्चों की कतार टूट गई। सबको खिड़की वाली सीट चाहिए थी। दस वर्ष की सना…
आखिरी गेंद का फैसला: खेल जीतने से बड़ी बात क्या बचानी थी?
मोहल्ले की छोटी क्रिकेट प्रतियोगिता में पहली बार लड़के और लड़कियाँ मिलकर टीम बना रहे थे। नियम बहुत सरल थे। गेंद पड़ोस क…
खुदीराम बोस: कम आयु का साहस और इतिहास को पूरी गंभीरता से पढ़ने की जरूरत
किसी विद्यालय की प्रदर्शनी में खुदीराम बोस का चित्र लगा हो, तो उसके नीचे लिखी आयु बच्चों को चौंका सकती है। जिस उम्र में…
कौटिल्य का प्रश्न: पद मिलने पर सबसे पहले किसका काम होना चाहिए?
नई समिति का अध्यक्ष बनने पर प्रशांत के पास सबसे पहले मंच की सजावट का प्रस्ताव आया। उद्घाटन में कौन बैठेगा, नाम किस क्रम…
कालिदास का आरंभ: सुंदर शब्द तभी काम आते हैं जब अर्थ साथ हो
आरोही को विद्यालय के समारोह के लिए स्वागत संदेश लिखना था। उसने बहुत प्रभावशाली शब्द चुने। वाक्य लंबे थे, विशेषण चमक रहे…
गार्गी: उत्तर के नीचे छिपे अगले प्रश्न तक पहुँचने का साहस
किसी बड़ी विद्वत्-सभा की कल्पना करते समय हमारे मन में प्रायः बोलने वाले लोगों की संख्या, उनके पद और उनके ज्ञान की प्रति…
दुर्गा देवी वोहरा: किसी चेहरे को देखकर उसकी क्षमता का फैसला मत कीजिए
हम किसी व्यक्ति को देखकर उसके बारे में जल्दी-जल्दी निष्कर्ष बना लेते हैं। उसके कपड़े, आयु, साथ खड़े लोग और बोलने का ढंग…
बुद्ध का संदेश: विरोध का उत्तर देते समय वैर की श्रृंखला कहाँ रोकें?
दफ्तर के समूह में एक कटु संदेश आया। काम की देरी का पूरा दोष समीरा पर रख दिया गया था। उसने तुरंत उत्तर लिखना शुरू किया।…
रामप्रसाद बिस्मिल: जब शब्दों को अपने जीवन की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ी
एक पर्चा हाथ से हाथ जाता है। कोई उसे पढ़कर आगे बढ़ता है, कोई सँभालकर रखता है और कोई उसके विचार से असहमत होता है। स्वतंत…
बीना दास: एक घटना से आगे बढ़कर किसी पूरे जीवन को कैसे पढ़ें?
इतिहास की पाठ्यपुस्तक में कोई व्यक्ति कभी एक वाक्य में दिखाई देता है। उसने अमुक दिन अमुक काम किया और उसे अमुक दंड मिला।…
भगत सिंह: नारा याद है, लेकिन उसके पीछे का विचार कितना समझा?
भगत सिंह की तस्वीर देखते ही बहुत-से लोगों को एक नारा याद आता है। कुछ को उनकी टोपी, कुछ को उनकी युवा आयु और कुछ को स्वतं…
बटुकेश्वर दत्त: इतिहास में दूसरे लिखे नाम को पहले ध्यान से पढ़िए
किसी ऐतिहासिक घटना का वर्णन सुनते समय एक नाम हमारे मन में रह जाता है और दूसरा धीरे-धीरे पृष्ठभूमि में चला जाता है। 1929…
चंद्रशेखर आजाद: साहस की चमक के पीछे छिपा संगठन और अनुशासन
हम इतिहास के साहसी व्यक्तित्वों को अक्सर एक निर्णायक क्षण में स्थिर कर देते हैं। चंद्रशेखर आजाद का नाम आते ही उनकी निर्…
अशोक के अभिलेख: विजय के साथ उसकी कीमत याद रखने का साहस
इतिहास में विजयों का वर्णन पढ़ते समय हमारी दृष्टि अक्सर सेनाओं, सीमाओं और शासकों पर रुक जाती है। किसी स्थान को जीत लिया…
अशफाकउल्ला खान: साझा देश के लिए साथ खड़े होने का अर्थ
इतिहास की एक तस्वीर में कई चेहरे होते हैं, लेकिन हमारा ध्यान प्रायः सबसे परिचित चेहरे पर टिक जाता है। फिर हम बाकी लोगों…
आर्यभट की नाव: जो चलता हुआ दिखाई दे, क्या वही चल रहा है?
रेल खड़ी थी। खिड़की के बाहर दूसरी गाड़ी धीरे-धीरे खिसकने लगी और रिद्धि को लगा कि उसकी यात्रा शुरू हो गई है। कुछ क्षण बा…
टूटी खिड़की और अधूरी माफी: गलती सुधारना कैसे सीखा जाता है?
बारिश के कारण बच्चों को उस दिन मैदान में खेलने नहीं दिया गया था। आठवीं कक्षा के अरुण ने गलियारे में कागज की गेंद बनाई।…
जीवन में शांति क्यों नहीं है, जबकि सुविधाएँ पहले से अधिक हैं?
रात के ग्यारह बजे अनिरुद्ध के घर की सारी बत्तियाँ बुझ चुकी थीं। केवल बैठक में नई खरीदी गई बड़ी स्क्रीन चमक रही थी। उसके…
मन को शांत रखना सीखें—हर परिस्थिति हमारे अनुसार नहीं होगी
प्लेटफॉर्म पर खड़ी सविता ने घड़ी देखी और फिर टिकट। सात बजकर दस मिनट वाली ट्रेन की जगह पटरी खाली थी। आज उसे शहर के विद्य…
चिंता कम करने का सबसे सरल तरीका: वर्तमान में जीना
बंद लिफाफे की रात रात के साढ़े ग्यारह बजे नंदिता तीसरी बार उसी लिफाफे को उठाकर मेज पर रख चुकी थी। उसमें उसके बेटे ईशान…
अकेलापन: भीड़ के बीच भी मनुष्य अकेला क्यों होता जा रहा है?
भरी मेज की खाली कुर्सी उस रविवार विनय ने चौथी बार मोबाइल की स्क्रीन जलाई। परिवार का समूह शुभकामनाओं से भरा था। दफ्तर के…
हर बात को दिल पर लेना कैसे छोड़ें?
बैठक के बाद बचा एक वाक्य दफ्तर से लौटते हुए शालिनी ने बस की खिड़की के बाहर देखा, पर रास्ता पहचान नहीं पा रही थी। सुबह ब…
नकारात्मक विचारों से स्वयं को कैसे बचाएँ?
दुकान खुलने से पहले सुबह सवा आठ बजे महेश अपनी छोटी स्टेशनरी की दुकान के बाहर खड़ा था। शटर खोलने से पहले उसने सामने नई ख…
अधिक सोचने की आदत जीवन को कैसे प्रभावित करती है?
भेजा न गया उत्तर किरण ने संदेश लिखा, पढ़ा और मिटा दिया। फिर लिखा कि वह इस शनिवार मिलने आ सकती है। उसे लगा कि वाक्य बहुत…
मन की थकान पहचानें—शरीर नहीं, कभी-कभी मन को विश्राम चाहिए
छुट्टी का बेचैन दिन रविवार सुबह अनिरुद्ध ने तय किया था कि आज कुछ नहीं करेगा। पिछले सप्ताह लगातार काम के बाद उसे आराम चा…
दूसरों से तुलना करना बंद करेंगे तो जीवन कैसे बदलेगा?
दूसरे की खिड़की का प्रकाश रमा ने अपनी सिलाई मशीन बंद की और पड़ोस के घर की चमकती खिड़की देखी। सामने नई कार खड़ी थी। पड़ो…
अपेक्षाएँ कम करना क्या वास्तव में सुख बढ़ाता है?
जन्मदिन की चुप शाम नीलिमा ने शाम सात बजे तक तीन बार दरवाजे की ओर देखा। जन्मदिन था। सुबह बेटे ने प्रणाम किया था, पति ने…
जीवन में अनुशासन क्यों प्रेरणा से अधिक महत्वपूर्ण है?
मेज पर लगी तारीख रोहित ने दीवार पर नई समय सारिणी चिपकाई। सुबह पाँच बजे उठना, दो घंटे पढ़ना, फिर काम पर जाना और रात में…
सुबह की पहली एक घंटा आपके पूरे दिन को कैसे बदल सकती है?
सुबह का पहला झगड़ा सुबह सात बजकर दस मिनट पर सुरेश घर से निकला। बैग की जिप खुली थी, नाश्ता आधा रह गया था और वह पत्नी से…
छोटी-छोटी अच्छी आदतें बड़े जीवन-परिवर्तन कैसे लाती हैं?
गायब हुए दस मिनट विद्यालय की पुस्तकालय प्रभारी अर्चना ने अलमारी के सामने खड़े होकर फिर वही किताब खोजी। विद्यार्थी बाहर…
काम टालने की आदत से बाहर कैसे निकलें?
अधूरी फाइल का आखिरी दिन शुक्रवार रात निखिल ने अलमारी के ऊपर रखी नीली फाइल उतारी। कौशल प्रशिक्षण के लिए आवेदन की अंतिम त…
समय नहीं मिलता या हम समय का सही उपयोग नहीं करते?
कैलेंडर की खाली जगह सुजाता ने अपनी पुरानी ड्राइंग कॉपी निकालकर फिर वापस रख दी। वह चित्र बनाना सीखना चाहती थी। हर महीने…
दिनभर व्यस्त रहना और वास्तव में उपयोगी कार्य करना—दोनों में अंतर
रात तक चलता काम रात नौ बजे प्रशांत ने लैपटॉप बंद किया और राहत से कहा कि आज बहुत काम हुआ। पत्नी ने पूछा कि जरूरी भुगतान…
संकल्प क्यों टूट जाते हैं और उन्हें निभाने का व्यावहारिक तरीका क्या है?
नौवें दिन बंद हुई डायरी मनीष ने जनवरी की पहली सुबह नई डायरी खोली और छह संकल्प लिख दिए। सुबह पाँच बजे उठना, एक घंटा पढ़न…
जीवन में लक्ष्य होना क्यों आवश्यक है?
मेज पर रखे सात आवेदन निखिल की मेज पर सात आवेदन थे। एक बैंक की परीक्षा का, एक कंप्यूटर पाठ्यक्रम का, एक बिक्री की नौकरी…
हर दिन थोड़ा बेहतर बनने की कला
बंद दराज में रखा पहला काम शनिवार की दोपहर नीलिमा अपनी सिलाई की दुकान बंद करने ही वाली थी कि एक बुजुर्ग महिला ने दरवाजा…
असफलता के बाद स्वयं को दोबारा कैसे खड़ा करें?
जिस दुकान का शटर तीन दिन बंद रहा राघव ने तीसरी सुबह भी दुकान का शटर नहीं उठाया। भीतर मेज पर दर्जनों छोटे डिब्बे रखे थे…
मोबाइल हमारे जीवन का साधन है या स्वामी बन चुका है?
मेज पर रखा हुआ फोन अनिरुद्ध को उस शाम पहली बार डर लगा कि उसके पिता सचमुच घर छोड़कर चले गए हैं। दरवाजे के पास उनकी चप्पल…
सोशल मीडिया से तुलना, चिंता और असंतोष क्यों बढ़ रहा है?
तस्वीर के पीछे का कमरा सोनाली ने अपने कमरे का परदा तीसरी बार बदला, लेकिन उसे तस्वीर फिर भी पसंद नहीं आई। मेज पर किताब र…
डिजिटल उपवास: कुछ समय मोबाइल से दूर रहना क्यों आवश्यक है?
रविवार का बिना तस्वीर वाला रास्ता विवेक ने घर से निकलते समय फोन उठाया और फिर मेज पर रख दिया। उसी क्षण उसे लगा कि कोई बड…
स्क्रीन कम और वास्तविक जीवन अधिक—इस संतुलन को कैसे बनाएँ?
खेल के मैदान का खाली कोना रोहन रविवार सुबह बेटे को मैदान ले गया तो उसने सबसे पहले तस्वीर लेने के लिए फोन निकाला। बेटा ब…
जानकारी बहुत है, लेकिन ज्ञान और विवेक क्यों कम होता जा रहा है?
बंद लिफाफे की खबर निखिल ने सुबह कार्यालय पहुँचने से पहले ही तय कर लिया था कि आज प्रबंधक से तीखी बात करेगा। समूह में एक…
बच्चों को मोबाइल देने से पहले माता-पिता को क्या समझना चाहिए?
नया फोन और पुराना सवाल मोहित ने बेटे के लिए नया फोन खरीद लिया था, लेकिन डिब्बा खोलते समय हाथ रुक गया। नौ साल के आरव ने…
परिवार में साथ रहते हुए भी दूरी क्यों बढ़ रही है?
खाने की मेज पर चार प्लेटें शालिनी ने उस रात चार प्लेटें रखीं, फिर एक वापस उठा ली। बड़ा बेटा बाहर खा चुका था, पति की बैठ…
परिवार में संवाद समाप्त हो जाए तो संबंध कैसे कमजोर होते हैं?
वह चिट्ठी जो घर में नहीं पढ़ी गई दीपक को बेटे की कॉपी से एक मुड़ी हुई चिट्ठी मिली। उसमें लिखा था कि विद्यालय बदलने के आ…
बच्चों को सुविधा अधिक चाहिए या समय और संस्कार?
सबसे महँगा जन्मदिन उपहार कुणाल ने बेटी के जन्मदिन के लिए बड़ा उपहार खरीदा था। वह कई दिनों से सोच रहा था कि इस बार उसे क…
माता-पिता बच्चों को सफल बनाने से पहले अच्छा मनुष्य कैसे बनाएँ?
पुरस्कार और गायब पेंसिल मंजरी ने बेटे का पुरस्कार बैठक की मेज पर रखा था। विद्यालय की प्रतियोगिता में उसका चित्र चुना गय…
बच्चों में क्रोध और चिड़चिड़ापन क्यों बढ़ रहा है?
टूटा हुआ नीला कप अर्पिता ने रसोई से आवाज सुनी तो दौड़कर आई। मेज के पास नीला कप टूटा पड़ा था और दस साल का समर दरवाजे पर…
किशोर बच्चों से मित्रवत संवाद कैसे करें?
दरवाजे के उस पार की आवाज सोलह साल की नंदिनी ने उस शाम दरवाजा इतनी जोर से बंद किया कि बैठक की घड़ी हिल गई। पिता संजय उठे…
बच्चों को अनुशासन सिखाएँ, लेकिन भय पैदा न करें
जिस दिन बच्चा सच बोलकर भी डर गया नौ साल का देव रात को अपना स्कूल बैग लेकर पिता के सामने खड़ा था। उसके हाथ में एक फटी हु…
अच्छी संगति जीवन को बनाती है और बुरी संगति बिगाड़ती है
रास्ते में बदला हुआ मोड़ चौदह साल का करण उस दोपहर घर जल्दी लौट आया। उसकी साइकिल की घंटी टूटी हुई थी और कमीज पर मिट्टी ल…
पति-पत्नी के संबंध में सम्मान प्रेम जितना ही आवश्यक क्यों है?
जिस शाम मेज पर दो थालियाँ थीं, पर कोई बातचीत नहीं नीलम ने दूसरी बार दाल गरम की और घड़ी देखी। साढ़े नौ बज चुके थे। राघव…
रिश्तों में ‘मैं सही हूँ’ की जिद कितनी हानिकारक है?
टूटी दीवार से बड़ा कौन था? सुबह छह बजे रसोई की खिड़की के बाहर पानी बहने की आवाज आई। सीमा ने पर्दा हटाया तो पिछवाड़े की…
क्षमा करना कमजोरी नहीं, मानसिक शक्ति क्यों है?
वह चाबी जो दरवाजे से ज्यादा मन में अटकी थी पाँच साल बाद पुराने घर की मरम्मत का समय आया तो माधव को अलमारी के नीचे एक छोट…
किसी की आलोचना करने से पहले स्वयं को देखने की आदत
गलत बिल किसके हाथ में था? कार्यालय खुलने से पहले ही प्रवीण ने समूह में एक लंबा संदेश भेज दिया। कल ग्राहक का बिल गलत बना…
लोग क्या कहेंगे—इस भय से बाहर कैसे निकलें?
बंद दुकान का नया बोर्ड रश्मि ने सिलाई मशीन की आवाज बंद की और दरवाजे की दरार से बाहर देखा। पड़ोस की दो महिलाएँ नए बोर्ड…
हर व्यक्ति को प्रसन्न रखने का प्रयास क्यों छोड़ देना चाहिए?
वह रविवार जो सबका था, केवल उसका नहीं दीपक ने रविवार सुबह का समय अपनी बेटी के विद्यालय की प्रदर्शनी के लिए रखा था। उसने…
धन आवश्यक है, लेकिन जीवन का उद्देश्य केवल धन क्यों नहीं हो सकता?
वह कमरा जिसकी बत्ती हमेशा बंद थी विवेक ने नया घर खरीदते समय सबसे ऊपर वाले कमरे को अपने पिता के लिए चुना था। खिड़की से प…
सफलता और संतोष में से जीवन को वास्तव में क्या चाहिए?
तालियों के बाद खाली मेज नगर के सभागार में अविनाश का नाम पुकारा गया तो पीछे बैठे उसके माता पिता खड़े हो गए। उसे व्यापार…
कम आवश्यकताओं वाला जीवन अधिक शांत कैसे हो सकता है?
तीसरा संदूक घर बदलने वाले मजदूर ने तीसरा संदूक उठाते हुए पूछा, “इसमें क्या है?” सुधा ने कहा, “जरूरी सामान।” उसने ढक्कन…
ईर्ष्या से प्रेरणा तक—दूसरों की सफलता को सही दृष्टि से कैसे देखें?
मिठाई का डिब्बा और बंद दरवाजा अमित ने दरवाजा खोला तो सामने उसका मित्र देव मिठाई लेकर खड़ा था। उसका चयन एक अच्छे पद पर ह…
सुख वस्तुओं में है या हमारी मानसिक अवस्था में?
नया फोन, पुरानी बेचैनी मोहित ने फोन का डिब्बा सावधानी से खोला। महीनों से उसकी इच्छा थी कि कैमरा अच्छा हो, स्क्रीन बड़ी…
कृतज्ञता की आदत मनुष्य का जीवन कैसे बदल सकती है?
लौटाई गई छतरी बस अड्डे पर तेज बारिश थी। नेहा के हाथ में दो थैले और एक जरूरी फाइल थी। वह छत के नीचे खड़ी थी, लेकिन पानी…
आत्मचिंतन के लिए प्रतिदिन कुछ समय निकालना क्यों आवश्यक है?
पाँच मिनट की खाली जगह शेखर हर रात सोने से पहले अगले दिन की सूची बनाता था। दुकान खोलनी है, माल मँगाना है, ग्राहक को फोन…
योग, ध्यान और प्रार्थना/उपासना जैसी दिनचर्या आधुनिक जीवन में क्यों उपयोगी है?
सुबह की वह चौखट सुमित की सुबह आँख खुलने से पहले ही शुरू हो जाती थी। मोबाइल की घंटी, काम के संदेश और खबरों की आवाज उसे ब…
जीवन में धर्म का अर्थ केवल कर्मकांड नहीं, सही आचरण भी है
पूजा के बाद मिला पर्स रमेश अपनी सुबह की उपासना कभी नहीं छोड़ते थे। समय निश्चित था, स्थान साफ रहता और परिवार जानता था कि…
ऐसा जीवन कैसे जिएँ कि अंत में पछतावा कम और संतोष अधिक हो?
अधूरा पत्र किसके नाम था? सेवानिवृत्ति के बाद पहले सोमवार को अशोक पाँच बजे उठ गए। वर्षों की आदत थी। चाय बनाई, अखबार खोला…
बुरी संगत आपका पूरा जीवन कैसे बदल सकती है?
मनुष्य का जीवन केवल उसके अपने विचारों से नहीं बनता। वह उन लोगों से भी गहराई से प्रभावित होता है, जिनके साथ वह अधिक समय…
घर के झगड़े, घर की अव्यवस्था और घर का वातावरण... कहीं आप अनजाने में अपने बच्चे का मस्तिष्क तो कमजोर नहीं कर रहे?
कल्पना कीजिए... रात के लगभग साढ़े दस बजे हैं। पूरा मोहल्ला धीरे-धीरे शांत हो चुका है। कहीं दूर किसी कुत्ते के भौंकने की…
बच्चे को हर बात पर "जीनियस" कहना आज ही बंद कर दीजिए, वरना अनजाने में उसके भविष्य को कमजोर कर सकते हैं
एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी के लिए सैकड़ों युवाओं का साक्षात्कार चल रहा है। सभी योग्य हैं, सभी पढ़े-लिखे हैं, सभी ने…
यदि आपने अपने बच्चे को बचपन में पैसे का मूल्य नहीं सिखाया, तो बड़ा होकर धन होते हुए भी वह गरीब रह सकता है
कल्पना कीजिए... आज से तीस वर्ष बाद का समय है। एक विशाल, चमचमाता हुआ बंगला है। बाहर महँगी कारें खड़ी हैं। घर में आधुनिक…
यदि आज आपने अपने बच्चे को तर्क करना नहीं सिखाया, तो कल वह भीड़ में खड़ा होकर स्वयं को सबसे असहाय पाएगा
कल्पना कीजिए... आज से लगभग पच्चीस वर्ष बाद का समय है। एक विशाल सभागार है। देश-विदेश के विद्वान, वैज्ञानिक, उद्योगपति और…
मिठाई के नाम पर कहीं आप अपने बच्चों को मीठा ज़हर तो नहीं खिला रहे हैं?
बचपन जीवन का सबसे सुंदर, सबसे कोमल और सबसे महत्वपूर्ण काल होता है। यही वह समय है जब शरीर का निर्माण होता है, मस्तिष्क क…
यह मिट्टी नहीं हमारी पहचान है।
जब हम अपने देश के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे सामने एक नक्शा आता है, कुछ झंडे लहराते दिखते हैं या हम राष्ट्रगान…
माता पिता कौन है ?
जब आप सुबह सोकर उठते हैं और अपने सामने रखे पानी के गिलास को उठाते हैं, तो क्या आपने कभी सोचा है कि उस गिलास को पकड़ने व…
भगवान बनाने वाला भिखारी: मनुष्य का सबसे बड़ा पाखंड!
सृष्टि के इस अनंत और रहस्यमयी रंगमंच पर यदि किसी दर्शक को बैठाकर पृथ्वी का तमाशा दिखाया जाए, तो वह निश्चित रूप से एक ही…
संस्कृत: तार्किक एवं बौद्धिक विकास का आधार
संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं है, बल्कि यह मानव मस्तिष्क को परिष्कृत करने का एक वैज्ञानिक उपकरण है। तार्किक दृष्टि…
गुरुकुल के छात्र की क्षमता
आज मैं जिस विषय पर आपके समक्ष अपने विचार प्रकट करने जा रहा हूँ, वह केवल एक शिक्षा-पद्धति का वर्णन नहीं, बल्कि एक ऐसी दि…